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Union Budget 2019 Highlights : बेरोजगार के सिरदर्द से कैसे होगी नैया पार

हर हाथ रोजगार के जिस नारे के साथ मोदी सरकार ने दुबारा सत्ता हासिल की है उससे एक बात तो तय लग रही है कि रोजगार के मुद्दे पर इस बजट में कुछ खास होने की उम्मीद लगाना बेइमानी नहीं होगी। बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में मुद्रा लोन योजना जैसी स्कीम शुरू की जो थोड़ा बहुत कामयाब रही पर इसी के भरोसे बढ़ती बेरोजगारी को रोक पाना संभव नहीं है।

Union Budget 2019 Highlights : बेरोजगार के सिरदर्द से कैसे होगी नैया पार
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Union Budget 2019 Highlights Modi Government Unemployment Problems

प्रचंड जीत दर्ज करके लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी करने वाली मोदी सरकार (Modi government) 5 जुलाई को अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट (Union Budget 2019) पेश करेगी। इस बजट पर सबकी नजर है। खासकर रोजगार की तलाश में भटक रहे लोगों ने इस बजट से खासी उम्मीद पाल रखी है। भाजपा का इसके पहले का कार्यकाल रोजगार के मामले में काफी फीका रहा था। बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) चार दशक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई जिसे लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया।

हर हाथ रोजगार के जिस नारे के साथ मोदी सरकार ने दुबारा सत्ता हासिल की है उससे एक बात तो तय लग रही है कि रोजगार के मुद्दे पर इस बजट में कुछ खास होने की उम्मीद लगाना बेइमानी नहीं होगी। बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में मुद्रा लोन योजना जैसी स्कीम शुरू की जो थोड़ा बहुत कामयाब रही पर इसी के भरोसे बढ़ती बेरोजगारी को रोक पाना संभव नहीं है।


सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे का कारण क्या है क्योंकि बिना मर्ज पता किए इलाज संभव नहीं है। दरअसल देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पिछले वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रही। पिछले पांच साल में ये सबसे निचले स्तर पर है। जीडीपी में गिरावट से मैन्युफैक्चरिंग सुस्त हो गई और कारखानों से लोगों को छंटनी की जाने लगी।

कार की बिक्री आठ साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई। बड़े बिजनेसमैन भी पैसा लगाने से हिचक रहे हैं। घटी जीडीपी के कारण सरकार ने भी सरकारी भर्तियां निकालने में लेटलतीफी दिखाई। कई बार भर्तियां निकालने के बाद भी रद्द कर दी गई। इस कारण रोजगार के लिए लाइन में खड़े लोगों को संख्या लगातार बढ़ती चली गई। और 45 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

सरकार में ही श्रम मंत्री रहे संतोष गंगवार (Santosh Gangwar) ने इन बातों और आंकड़ों को फर्जी बताते हुए सरकार के कामों को बता दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2018-19 के वित्तीय वर्ष में 5,86,728 रोजगार दिए साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 18 करोड़ लोन बांटे गए।


आगामी बजट के लिए जीडीपी चुनौती बना हुआ है। रोजगार बढ़ाने के मुद्दे पर अगर सरकार कोई बड़ी पहल करती है तो उसे जमीन पर उतार पाना बेहद मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं है। इसी साल फरवरी में आंतरिम बजट जारी करते वक्त पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा था कि भारत में अब नौकरी करने वाले नौकरी देने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप हब बन गया है। फिलहाल स्टार्ट-अप के बावजूद भी बेरोजगारी कम होती नहीं दिख रही है। सरकार को कई मोर्चों पर काम करने की जरूरत है। वह अभी भी स्टार्ट-अप, मुद्रा लोन को बढ़ाते हैं या फिर सरकारी नौकरियों को बढ़ाने के लिए कोई बड़ा फैसला लेते हैं। ऐसे ही तमाम कयास फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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