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Union Budget 2019 : मौसम की मार झेल रहे किसानों को सरकार से उम्मीद, बजट से पूर्व कृषि नेताओं ने रखी ये मांग

Union Budget 2019 : बारिश न होने की वजह से आम लोगों को ही नहीं किसानों को भी बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा। कायदे से देखा जाए तो हमारा देश कृषि प्रधान देश है। हमारे यहां करीब 55 फीसदी से ज्यादा किसान मानसून सीजन में होने वाली बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। अगर बारिश न हो तो किसान आसमान की तरफ देखने के साथ-साथ सरकार की तरफ भी देखते हैं।

Union Budget 2019 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में सर्वे रिपोर्ट पेश की
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Budget 2019 Highlights Live Update Economic Survey Report Paliament by chief economic advisor kv subramanyam

इस साल जून महीनें तक मानसून बेहद कमजोर रही है। मौसम विभाग के अनुसार सूखे के आसार नजर आ रहे हैं। बारिश न होने की वजह से आम लोगों को ही नहीं किसानों को भी बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा। कायदे से देखा जाए तो हमारा देश कृषि प्रधान देश है। हमारे यहां करीब 55 फीसदी से ज्यादा किसान मानसून सीजन में होने वाली बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। अगर बारिश न हो तो किसान आसमान की तरफ देखने के साथ-साथ सरकार की तरफ भी देखते हैं।

किसानों को सरकार से अब तो और उम्मीदें हैं क्योंकि आगामी 5 जुलाई को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी। आज 1 जुलाई है 4 दिन बाद ही सरकार बजट पेश करेगी। किसानों की मानें तो मोदी सरकार-2 से उन्हें बड़ी उम्मीदें हैं। इस साल जून तक की बारिश को देखते हुए आगे बारिश होनें की कम ही उम्मीदें लगाई जा रही हैं। ऐसे में किसान सरकार के बजट पर ही आश्रित नजर आ रही है।

पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में किसानों के लिए कई योजनाएं भले ही दी हों लेकिन जमीनी हकिकत कुछ और ही है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो 2014 में करीब 12 हजार, 2015 से 2018 तक 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य भले ही डेढ़ गुना कर दी हो लेकिन यहीं तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला। जब खेतों में पैदावार ही नहीं होंगे तो वे बेचेंगे कहां। ये भी सवाल उठता है।

बजट से पूर्व किसान संघर्ष समिति ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगों को रखा है, आईए जानते हैं किसानों की क्या मांगे हैं...

कृषि उपकरणों की खरीद हो सस्ती

किसान संघर्ष समिति ने मोदी सरकार से मांग की है कि कृषि उपकरणों की खरीद में ढिलाई दी जाए। किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने की योजना बनाई जाए। इसके साथ ही उपकरणों की खरीद पर सरकार द्वारा सब्सिटी भी दी जाए। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दुष्यंत नागर ने मीडिया से कहा कि अगर सिचाईं मशीन और ट्रैक्टर जैसे कृषि उपकरणों पर ब्याज नहीं लिया जाए तो किसानों के लिए वरदान साबित होगा। उन्होंने कहा कि अगर इस दिशा में सरकार ने कुछ फैसला लिया तो किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा और इसके साथ ही उपज भी बढ़ेगी।

जल संरक्षण की हो पहल

जैसा कि पीएम मोदी ने दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद अपने मन की बात कार्यक्रम के जरिए राष्ट्र को संदेश दिया था कि दुनिया जल संकट से जूझ रहा है और हमें इस दिशा में कार्य करना चाहिए। किसानों की भी यही मांग है। देश में जल स्तर काफी तेजी से गिर रहा है। सरकार अगर ध्यान नहीं दी तो आने वाले सालों में स्थिति गंभीर हो सकती है।

डेयरी रोजगार को मिले बढ़ावा

भारतीय किसान शुरू से ही पशुपालन में रहे हैं। भारत में यह कृषि से जुड़ा रोजगार है। इसी वजह से किसान इसमें रूचि लेते हैं। किसानों को दिक्कत यह है कि बाजार भाव व किसानों को मिलने वाली कीमत में संबंध स्थापित न होना। समस्या यह है कि पशुओं के चारे की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं खेतों में ऊपज कम हो रही है। ऐसे में सरकार से उम्मीद है कि किसानों व पशुपालकों की यह समस्या दूर हो।

सप्लाई चैन बेहतर हो

किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कृषि उपज होते ही सप्लाई चैन के दलाल एक्टिव हो जाते हैं। जिसके कारण किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता। ये इस तरह के दलाल होते हैं जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी फसलों को सस्ते दामों पर खरीद लेते हैं और उन्हें बाजार में महंगे दामों पर बेच देते हैं।

किसानों की मांग है कि कोई भी व्यापारी फसल कटाई के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे अनाज नहीं खरिदेगा। अगर वह ऐसा करता है तो उसके लिए सजा निर्धारित की जाए। अगर इस दिशा में कानून बन जाता है तो किसानों के लिए राहत की बात होगी।

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