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Sushma Swaraj Birthday : सुषमा स्वराज ने बढ़ाया देश का मान, इसलिए हर साल झुग्गी बस्तियों में मनाती थीं अपना जन्मदिन

Sushma Swaraj Birthday: भारत के इतिहास में सुषमा स्वराज का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है। वो गरीबों के मदद के लिए हमेंशा तैयार रहती थीं।

Sushma Swaraj Birthday : सुषमा स्वराज ने बढ़ाया देश का मान, इसलिए हर साल झुग्गी बस्तियों में मनाती थीं अपना जन्मदिन
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सुषमा स्वराज

Sushma Swaraj Birthday (सुषमा स्वराज जयंती) : सुषमा स्वराज के व्यक्तित्व के बारे में कौन नहीं जानता। वो गरीबों और वंचितों के मदद के लिए हमेंशा तैयार रहती थी। इतना ही नहीं, सुषमा स्वराज इतने उदार हृदय की थी कि अपना जन्मदिन भी हर साल झुग्गी बस्तियों में ही मनाती थी। यही कारण है कि विदेश मंत्रालय की ओर से आज कहा गया है कि प्रवासी भारतीय केंद्र का नाम बदलकर सुषमा स्वराज भवन और दिल्ली के फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट का नाम बदलकर सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस रखा जाएगा। नाम परिवर्तन के जरिए पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को उनके अमूल्य योगदान के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

गरीबों के खुशियों के बारे में सोचती थी सुषमा स्वराज

उन्होंने आरके पुरम के पास वाली झुग्गी बस्ती को गोद ले लिया था। उस वक्त वो सांसद थी। फिर उन्होंने उस बस्ती में सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाईं। उन्होंने उस बस्ती में सड़क, बिजली, पानी, नाली सबकी व्यवस्था करवाई। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की पूर्व नेता सदन शिखा रॉय के अनुसार सुषमा स्वराज राजनीति में आई ही इसलिए थी कि वो गरीबों की सेवा कर सके। जिसका सुनने वाला कोई नहीं हो, उसकी मदद के लिए हमेंशा तैयार रहे। उन्हें गरीबों की आवाज बनने और उनकी खुशियों के बारे में सोचने में बड़ा अच्छा लगता था। वो झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के दिल में इस तरह से बस गई थी कि वहां के लोगों का सिर उनके सम्मान के में झुक जाता था।


झुग्गी बस्तियों से था खास लगाव

सांसद के पद से हटने के बाद भी वो अपना जन्मदिन झुग्गी बस्तियों में ही मनाती थी। एक बार तो ऐसा हुआ था कि सुषमा स्वराज की तबियत बिगड़ गई थी। तो उस साल वो अपना जन्मदिन मनाने वहां नहीं जा सकी। उस साल उन्होंने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को अपना जन्मदिन मनाने वहां भेज दिया। इन झुग्गी बस्तियों के लोगों से उनका ऐसा लगाव था कि कोई भी समस्या आती थी तो वो उन्हें ही फोन किया करते थे।

अपने घर पर मनाती थी तीज और करवाचौथ

शिखा रॉय के अनुसार सुषमा स्वराज धार्मिक रूप से भी सक्रिय थी। वो तीज और करवाचौथ अपने घर पर ही मनाया करती थी। जिसमें कई महिलाएं उनसे मिलने आया करती थी। सुषमा स्वराज उन महिलाओं से करवाचौथ की कहानियां भी सुना करती थी। महिला दिवस के दिन भी वो महिलाओं का जागरुक बनाने की शिक्षा देती थी।

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