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तलाक के नोटिस के खिलाफ मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय एक महिला को उसके पति द्वारा तलाक देने के लिये दो नोटिस दिये जाने को चुनौती देने और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के लिये बृहस्पतिवार को राजी हो गया।

तलाक के नोटिस के खिलाफ मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय एक महिला को उसके पति द्वारा तलाक देने के लिये दो नोटिस दिये जाने को चुनौती देने और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के लिये बृहस्पतिवार को राजी हो गया।

न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अवकाश कालीन पीठ ने कहा कि इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की जायेगी। इस महिला के वकील एम एम कश्यप ने कहा कि उसके शौहर ने नौ साल की शादी बाद इस साल मार्च और मई में उसे तलाक के नोटिस दिये हैं।

उन्होंने कहा कि महिला की मुस्लिम रीति रिवाजों के साथ इस व्यक्ति से 22 फरवरी, 2009 को शादी हुयी थी और उसके दो बच्चे हैं। लउ़का नौ साल और लड़की छह साल की है।

पीठ ने जानना चाहा कि इस मामले में राहत के लिये उच्च न्यायालय क्यों नहीं गये तो कश्यप ने कहा कि शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त, 2017 के फैसले में मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया है और तलाक के लिये पति द्वारा दिये गये नोटिस से इस फैसले का उल्लंघन होता है।

दिल्ली निवासी इस महिला का कहना है कि उसके शौहर और ससुराल के सदस्यों ने शादी के तुरंत बाद ही अतिरिक्त दहेज और कार के लिये परेशान करना और उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया था।

महिला ने याचिका मे कहा है कि उसे पहला नोटिस 25 मार्च को और दूसरा नोटिस सात मई को भेजा गया है।

याचिका में महिला ने प्रधिकारियों को उसके शौहर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि 12 जनवरी से लागू मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश, 2019 भी उसके पक्ष में हैं।

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