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सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट कंपनियों और फैक्टरियों को दी राहत, कर्मचारियों को सैलरी देने में विफल होने पर नहीं होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार उन प्राइवेट नियोक्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी, जोकि देश में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को मजदूरी देने में नाकामयाब रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट कंपनियों और फैक्टरियों को दी राहत, कर्मचारियों को सैलरी देने में विफल होने पर नहीं होगी कार्रवाई
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्मचारियों को वेतन देने के मामले में प्राइवेट सेक्टर के नियोक्ताओं, फैक्ट्रियों और इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह कंपनियां लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हों तो सरकार ऐसे प्राइवेट नियोक्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती है। बता दें कि कई उद्योगों ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वेतन भुगतान के संबंध में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच राज्य सरकारों के श्रम विभागों द्वारा वार्ता कराई जाएगी। 54 दिन के लॉकडाउन के दौरान अपनी मजदूरी के लिए मजदूरों को बात करनी होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 मार्च को केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा मजदूरों को पूरी सैलरी दिए जाने के नोटिफिकेशन की वैधता पर अदालत ने केंद्र से एक महीने यानी 4 हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। इस मामले को लेकर जुलाई के अंतिम हफ्ते में फिर सुनवाई होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने MSMEs सहित कई कंपनियों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट के फैसले का निचोड़

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार उन प्राइवेट नियोक्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी, जोकि देश में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को मजदूरी देने में नाकामयाब रहे हैं। राज्य सरकार के श्रम विभागों द्वारा सैलरी की सुविधा के संबंध में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच बातचीत मजदूरों को 54 दिन के लॉकडाउन की मजदूरी के भुगतान के लिए बातचीत करनी होगी।

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