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सुप्रीम कोर्ट प्रवासी मजदूरों की आवाजाही पर सख्त, केंद्र सरकार को दिया ये आदेश

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि प्रवासी मजदूरों की आवाजाही बंद नहीं हुई है, यह कैसे सत्यापित किया जाएगा। कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वे लोगों को उनके मूल गांव वापस भेजेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट

देश में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की आवाजाही के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश जारी किए हैं। जिसमें कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार को मामले की जांच करने और 2 राज्यों के बीच मजदूरों की आवाजाही के मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि प्रवासी मजदूरों की आवाजाही बंद नहीं हुई है, यह कैसे सत्यापित किया जाएगा। कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वे लोगों को उनके मूल गांव वापस भेजेंगे। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से किसी भी तरह की आवाजाही की अनुमति नहीं है।

इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों की आवाजाही के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम जारी किया था। जिसमें मजदूरों को किसी भी प्रकार की अंतर-राज्य आवाजाही की इजाजत नहीं है।

कुछ शर्तों के साथ दी जाएगी अनुमित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा था कि लॉकडाउन के कारण देश के अनेकों राज्यों में फंसे हुए मजदूरों को कुछ शर्तों के साथ राज्य के अंदर उनके काम के स्थानों पर जाने की इजाजत दी जाएगी। हालांकि, 3 मई तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को किसी भी तरह की अंतर-राज्य आवाजाही की इजाजत नहीं होगी।

मजदूरों की आवाजाही से संक्रमण का खतरा

बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने मजदूरों की आवाजाही रोकने के निर्देश जारी किये थे। जिसके बाद राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था कि सरकार को लॉकडाउन लागू करने के पहले मजदूरों का बंदोबस्त करना था। जबतक मजदूर गांव नहीं पहुंचे तब तक लॉकडाउन लागू किया नहीं जाना चाहिए था।

वहीं केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि यदि मजदूरों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई जाती तो कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता। जो जहां पर हैं वहीं रहें उनके खाने का प्रबंध किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने मुक्त राशन और जन धन के अकाउंट में नगदी और फ्री ईंधन भी उपलब्ध कराया था।

3.5 लाख से अधिक कैंप खोले गए, जहां मजदूरों को ठहराया गया था। इसके बाद भी राज्यों की तरफ से मोदी सरकार पर हुए हमले के बाद लाखों मजदूरों ने पैदल ही अपने घरों का रुख किया था। उनके कदम अभी भी अपने घरों की ओर बढ़ रहे है। इस बीच कोर्ट के निर्देश से इस पर विराम लगने की उम्मीद है।

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