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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा, कोरोना वायरस की मुफ्त जांच सुनिश्चित करें

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्राइवेट लैबों वाले कोरोना वायरस की जांच के मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट लैब को कोरोना वायरस की जांच के लिए रुपयों की इजाज़त नहीं होनी चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट

देशभर में कोरोना वायरस महामारी का कहर जारी है। भारत में लगातार कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्राइवेट लैबों वाले कोरोना वायरस की जांच के मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट लैब को कोरोना वायरस की जांच के लिए रुपयों की इजाज़त नहीं होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम प्राइवेट लैब को कोरोना वायरस (Covid 19) के परीक्षण के लिए पैसे वसूलने की अनुमति नहीं देते हैं। सरकार को कोविड 19 की जांच फ्री में करानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल जनरल तुषार मेहता को सुझाव देते हुए कहा कि निजी लैब को जांच के लिए अधिक शुल्क न दें। कोई ऐसा तंत्र विकसित करें जिसके तहत निजी लैब के टेस्ट राशि को सरकार वापस कर सके। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि वो इस मामले में उचित कदम उठाएंगे। सरकार अपनी तरफ से हर संभव प्रयास रही है।

प्रतिदिन हो रहे 15 हजार टेस्ट

सॉलिसिटर जनरल ने जानकारी दी है कि प्रतिदिन 118 प्रयोगशालाओं में रोजाना 15,000 टेस्ट हो रहे थे। इन 47 निजी प्रयोगशालाओं को जोड़ा गया। पता नहीं कितनी और चाहिए होंगी। अभी ये भी पता नहीं है कि लॉकडाउन कब तक चलेगा।

बता दें 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें सरकारी और निजी लैब में कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच निशुल्क कराने का दिशानिर्देश क्रेंद्र सरकार को देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को ईमेल आदि के माध्यम से याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को देने के निर्देश दिए थे।

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