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Lockdown: प्रवासी मजदूरों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, घर पहुंचने तक कोई भी भूखा नहीं रहे यह सरकार की जिम्मेदारी, किराया भी ना लिया जाए

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि प्रवासी मजदूरों से बसों-ट्रेनों का किराया न लिया जाए। सफर शुरू करने से पहले राज्य उन्हें खाना मुहैया कराएं।

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सुप्रीम कोर्ट

कोरोना संकट और लॉक डाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की बढ़ती बदहाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा है कि जो भी मजदूर एक राज्य से दूसरे राज्य जा रहे है और अपने घर तक जा रहा है। उसे खाना पानी उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि प्रवासी मजदूरों से बसों-ट्रेनों का किराया न लिया जाए। सफर शुरू करने से पहले राज्य उन्हें खाना मुहैया कराएं।

सुप्रीम कोर्ट में मजदूरों की बदहाली को लेकर सुनवाई शुरू हो गई है। कोर्ट ने इस मुद्दे को लेकर मीडिया रिपोर्ट और कोट को बड़ी संख्या में मिले पत्रों पर सोते संज्ञान लिया और जिसके बाद कहा कि जो भी प्रवासी मजदूर घर जा रहे हैं। उनके घर जाने तक की जिम्मेदारी खाने-पीने की सरकार की होगी।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें मजदूरों की बदहाली को लेकर मदर मजदूरों की बदहाली का मुद्दा उठाया गया है। कपिल सिब्बल , इंदिरा जयसिंह, कॉलिन गोंसाल्वेस, संजय पारिख जिरह कर रहे है।

सरकार की तरफ से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखते हुए कहा कि देश में ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन जो लॉक डाउन किया गया। उसके दो मकसद थे। एक तो कोरोना की चैन को तोड़ना और दूसरा अस्पतालों के अंदर स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी ठीक तरीके से करना लगातार सरकार गरीब मजदूरों का ध्यान रख रही है।

जहां एक तरफ सरकार लोगों को राशन मुहैया कराया है। यह तो वहीं दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की गई है। 1 मई से लेकर अब तक 91 लाख मजदूरों को उनके गृह राज्यों में भेजा गया है। 3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिये 50 लाख मजदूरों को भेजा गया। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों में करीब 41 लाख लोगो को बसों के जरिये भेजा गया।

केंद्र और राज्य मिलकर अपनी विचारधारा और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर माइग्रेशन के काम में लगे है। सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि रेलवे ने 80 लाख लोगों को खाना खिलाया है। यात्रा के दौरान पूरी तरह से स्क्रीनिंग की जा रही है और किसी को संक्रमण न फैले इस को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं।

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