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पेगासस जासूसी कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन, जारी किया ये बयान

पेगासस जासूसी कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन, जारी किया ये बयान
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पेगासस जासूसी कांड (Pegasus case) की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आखिरकार अहम निर्णय लिया है। कोर्ट ने बुधवार को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन (Court formed committee to investigate Pegasus case) किया है। कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट याचिकाओं से सहमत नहीं है, लेकिन न्याय जरूरी है। जिसके लिए हम एक कमेटी बनाने का निर्णय ले रहे हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमना (Chief Justice NV Ramana) ने इस मामले पर फैसला लिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की आजादी जरूरी है। कोर्ट आरोप लगाने वाली याचिकाओं से सहमत नहीं है। लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि ये याचिकाएं अखबारों में छपी खबरों पर आधारित हैं और मामले में दखल न देने का अनुरोध किया। लेकिन ऐसे में न्याय जरूरी है।

बता दें कि पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया, इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आरवी रवींद्रन, आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी, संदीप ओबेरॉय और तीन टैक्निकल सदस्य शामिल होंगे। जो इस पूरे मामले की जांच करेंगे और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेंगे। कोर्ट ने कहा कि आरोपों में प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग के संबंध में कोर्ट इस मामले में सभी मौलिक अधिकारों की रक्षा करेगा। जो लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। निजता के अधिकार का ख्याल रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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