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Facebook WhatsApp समेत सोशल मीडिया के अकाउंट होंगे Aadhar से लिंक!

सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जल्द ही आधार कार्ड अनिवार्य हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के बाद भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कहा है कि केंद्र सरकार को सोशल मीडिया खातों की विशिष्ट पहचान के लिए एक नया कानून बनाना चाहिए ताकि आधार से सोशल मीडिया को जोड़कर फर्जी लोगों पर कार्रवाई की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की, कहा- लोग आधे घंटे में खरीद सकते हैं AK-47
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Supreme Court expresses concern over misuse of social media, says anyone can buy AK-47 in half an hour

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोशल मीडिया (Social Media) को लेकर चल रहे एक केस में अदालत ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग इस स्तर पर पहुंच गया है कि हमें इंटरनेट से ज्यादा देश के लिए चिंतित होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के बाद आज यूएआईडीएआई ने कहा है कि सरकार को अलग से कानून बनाना चाहिए जिससे कि आधार को सोशल मीडिया अकाउंट के साथ जोड़ा जा सके, क्योंकि मौजूदा कानून के अनुसार उनके हिसाब से केवल अद्वीतिय पहचान का इस्तेमाल केवल सरकारी योजनाओं एवं सब्सिडी के लिेए किया जा सकता है।

अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही है जिसमें फेसबुक चाहती है कि मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जो याचिकाएं आती हैं उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की जाएं। ज्यादातर याचिकाएं सोशल मीडिया के दुरूपयोग से संबंधित हैं।


मद्रास हाईकोर्ट की दाखिल याचिका भी सोशल मीडिया खातों को उपयोगकर्ताओं की आधार संख्या और सोशल मीडिया कंपनियों के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोधों का जवाब नहीं देनेवालों की संभावना से भी संबंधित है।

यह केस फेसबुक इंक की ओर से दाखिल किया गया था और इस पर जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की बैंच सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि वर्तनाम में ऐसे हालत हो चुकी है कि लोग सोशल मीडिया के जरिए आधे घंटे के अंदर एके 47 भी खरीद सकते हैं।


जज गुप्ता इतने चिंतित नजर आए कि उन्होंने कहा कि वह स्मार्टफोन त्यागने की सोच रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते में हलफनामा देकर समयसीमा बताने के लिेए कहा है। तमिलनाडु सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कानून के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

कई बार फर्जी खबरों के प्रचार की वजह से कानून व्यवस्था बिगड़ जाती है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र नीतियां तैयार करते समय लोगों की निजता और देश की संप्रभुता का ध्यान रखे। नीतियां बनने के बाद ही कोर्ट फैसला करेगा कि वह संविधान के मुताबिक हैं या नहीं।

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