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Sunday Special: क्या होती है Fake News, जानें किस देश में है कानून जहां मिलती 6 साल की सजा

भारत में झूठी खबरें एक गंभीर चुनौती है। जिसकी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सड़क पर दंगे और मॉब लिंचिंग की घटनाएं इसका जीता जागता उदाहरण है। अभी हाल ही में भारत में कोरोना महामारी के दौरान भी वैक्सीन को लेकर कई तरह की फेक न्यूज देखने को मिली।

Sunday Special: क्या होती है Fake News, जानें किस देश में है कानून जहां मिलती 6 साल की सजा
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इंटरनेट की दुनिया में आज कल फेक न्यूज का चलन बहुत तेजी से चल रहा है। भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देशों में भी झूठी खबरों को तेजी से फैलाया जाता है। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुजुर्ग के साथ मारपीट हुई। जिसमें अब खबर सामने आ रही है कि ये फेक न्यूज के तौर पर फैली और इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यहां तक की भारत में ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनी से भी जवाब मांगा गया। केंद्र सरकार भी फेक न्यूज को लेकर गंभीरता से काम कर रही है।

मोबाइल और इंटरनेट आज भारत में ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते हैं और कुछ लोगों के फोन में सोशल मीडिया ऐप्स इंस्टॉल होते हैं। ऐसे ही कई ऐप हैं जैस ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता है कि वह जो न्यूज पढ़ रहे हैं वो सच्ची है या झूठ। कभी कभी फेक न्यूज को इस तरह से प्रजेंट किया जाता कि वह सच्ची खबरों को भी पीछे छोड़ देती हैं।

"फेक न्यूज" क्या है? (What is Fake News)

फेक न्यूज एक ऐसा शब्द है जिसका अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग मतलब है। ये न्यूज कभी कभी स्वयं गढ़ी गई होती हैं, जो लोगों को वास्तविक लगती हैं। जिसमें कोई सत्यापन योग्य तथ्य, स्रोत या उद्धरण नहीं हैं। कभी-कभी ये न्यूज प्रचार के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, जो जानबूझकर पाठक वर्ग को गुमराह करने के लिए बनाई जाती हैं। हाल ही के कुछ सालों में सोशल मीडिया के माध्यम से फेक न्यूज का प्रसार हुआ है।

फेक न्यूज का इतिहास (History of Fake News)

इंटरनेट की दुनिया में फेक न्यूज नया हो सकता है। लेकिन कहते है कि जब डिजिटल नहीं था। तो भी प्रभावशाली लोगों के द्वारा दुष्प्रचार और गलत सूचनाओं का प्रचार किया जाता था। लेकिन अब ये चीजें ग्लोबल स्तर पर सामने आई हैं। जिसकी वजह से कई जगहों पर हिंसा, दंगे, किसी का अपमान करना या फिर धर्मिक भेदभावना को बढ़ाया जाता है।




भारत में झूठी खबरें एक गंभीर चुनौती है। जिसकी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सड़क पर दंगे और मॉब लिंचिंग की घटनाएं इसका जीता जागता उदाहरण है। अभी हाल ही में भारत में कोरोना महामारी के दौरान भी वैक्सीन को लेकर कई तरह की फेक न्यूज देखने को मिली। जिसमें कहा गया कि वैक्सीन लेने के बाद लोग 2 साल में मर जाएंगे। वैक्सीन लगने वाले लोग नपुंसक हो जाएंगे। कई ऐसी फेक न्यूज जो तेजी से लोगों के बीच फैलती है। इन्हीं खबरों को रोकने के लिए केंद्र सरकार भी लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज पर शिकंजा कसती जा रही है।

क्यों फैलती हैं झूठी खबरें

भारत में कोरोना काल के बाद से ही झूठी खबरों की बाढ़ सी आ गई। 20219 में बच्चे चुराने वाली एक खबर सामने आई। जिसमें कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी। कई एक्सपर्ट का मानना है कि फेक न्यूज उन देशों में सफल हो पाती है, जहां लोगों पर भावात्मकता हावी रही हैं, चाहे डर हो या फिर नफरत या गुस्से के रुप में । ऐसे लोगों में झूठी खबरों को सच मान लेते हैं और फिर वह दूसरे लोगों तक इसे फैलाते हैं। इंटरनेट की दुनिया में यह काम तेजी से फैल रहा है।



इस देश के पास है कानून

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज को रोकने के लिए मलेशिया की सरकार ने कानून पास किया है। 2 अप्रैल को मलेशिया की सरकार ने फेक न्यूज पर पाबंदियां लगाते हुए कहा कि अगर कोई शख्स फेक न्यूज में संलिप्त पाया जाता है तो उसे 1 लाख 23 हजार डॉलर (करीब 80 लाख रुपये) का जुर्माना और 6 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसको लेकर मलेशिया में विपक्ष ने जमकर विरोध किया था।

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