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Sunday Special: आतंकवाद और नक्सलवाद में क्या है अंतर और उद्देश्य, यहां पढ़ें इससे जुड़ी पूरी जानकारी

भारत में आतंकवाद और नक्सलवाद (Terrorism and Naxalism) दो अलग मुद्दें है और दोनों की विचारधाराएं अलग हैं। लेकिन दोनों ही देश के जवानों का सीना छन्नी करने के लिए तैयार रहते हैं। हाल ही में हुई छत्तीसढ़ नक्सली हमला सबसे बड़ा उदाहरण है।

Sunday Special: आतंकवाद और नक्सलवाद में क्या है अंतर और उद्देश्य, यहां पढ़ें इससे जुड़ी पूरी जानकारी
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भारत में आतंकवाद और नक्सलवाद (Terrorism and Naxalism) दो अलग मुद्दें हैं और दोनों की विचारधाराएं अलग हैं, लेकिन दोनों ही देश के जवानों का सीना छन्नी करने के लिए तैयार रहते हैं। हाल ही में 5 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर (Bijapur of chhattisgarh) में हुए नक्सली हमले का जिक्र करना इसलिए जरूरी हो जाता है। क्योंकि देश के अंदर छिपे अपने ही लोग जवानों पर हमला कर उन्हें शहीद कर देते हैं। इस हमले के दौरान देश के 22 जवान शहीद हुए और 32 घायल हुए थे। एक जवान लापता हुआ और दो दिन बाद नक्सलियों से छुड़ा लिया गया। नक्सलवाद की शुरुआत बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई.....



नक्सलवाद क्या है और उसका उद्देश्य (What is naxalism and purpose)

सबसे पहले नक्सलवाद की बात करते हैं। इसकी चर्चा करना इसलिए भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि ये अपने देश के ही लोग होते हैं। जिसका मकसद सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना है। एक सीमित दायर या इलाका, जहां ये रहते हैं और वहां कोई आता है तो छोड़ते नहीं। वैसे नक्सलवाद मूलरूप से कानूनी समस्या है या विषमता के आर्तनाद से फूटता लावा। इसको भी समझना जरूरी है। एक धड़ा समझता है कि नक्सलवाद एक तरह से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं दूसरा धड़ा समझता है कि ये वह लोग हैं जो सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक और अन्याय से पीड़ित होते हैं। जो सरकार की नीतियों के खिलाफ विद्रोह करते हैं।

एक वाक्य हमेशा सुना और बताया जाता है....

हां, अब हमने उठा ली है, तुम्हारे खिलाफ बंदूक

तुम... जो समझते हो तमंचों की भाषा

लो धांय... धांय.... धांय.....




नक्सलवाद लाल आतंकी आंदोलन है। इस आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी। इसके मुख्य सूत्रधार चारु मजूमदार और कानू सान्याल थे। मजूमदार ने खुशहाल पारिवारिक छोड़कर क्रांतिकारी जीवन चुना। उनके जीवन पर कम्युनिस्ट पार्टी की छाप पूरी तरह से देखी जा सकती थी। दूसरी तरफ थे कानू सान्याल, इन्ही को भारत में नक्सलवादी आंदोलन का जनक मना जाता है। दार्जिलिंग में जन्म हुआ और यहीं से राजस्व क्लर्क की नौकरी छोड़कर तत्कालीन मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय को काला झंडा दिखाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में ही मजूमदार से मुलाकात हुई और इस तरह दोनों ने मिलकर नक्सवाद को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य सरकार की नीतियों का विरोध करना और लोगों को सरकार के कामकाज के बारे में बताना। दोनों का संबंध भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से रहा।




आतंकवाद और उसका ​उद्देश्य (Terrorism and Purpose)

अगर आतंकवाद की बात करें तो ये नक्लवाद से थोड़ा सा अलग है। आतंकवाद इस्लामी या जिहादी के साथ जोड़ा जाता है। समय के मुताबिक आतंकवाद की परिभाषा बदली। वैसे आतंकवाद की शुरुआत तालिबान से हुई। जिन्होंने धीरे-धीरे सामुहिक संगठन बनाएं और अन्य देशों की सरकारों के साथ मिलकर दुश्मन देशों में घुसकर हिंसा, धमाकों को अंजाम दिया। भारत में आतंकवाद एक बड़ी समस्या है। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देश आतंकवाद का शिकार हो चुके हैं। दुनिया का सबसे पावरफुल देश अमेरिका भी आतंकवाद के साय से नहीं बच सका।



आतंकवाद एक प्रकार के माहौल को कहा जा सकता है, जो हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देता है। किसी भी दूसरे देश में आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक और नागरिकों की सुरक्षा को निशाना बनाते हैं। हिंसा फैलाना ही इनका उद्देश्य होता है। राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक हिंसा को भी आतंकवाद की श्रेणी में ही रखा जा सकता है। उनका उद्देश्य किसी भी दूसरे देश की राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाना है। आतंकवाद का गढ़ पाकिस्तान को कहा जाता है। जिसका भारत के कश्मीर में सबसे ज्यादा प्रभाव दिखता है और कश्मीर के युवाओं का ब्रेन वॉश कर स्लीपर सेल बनाते हैं और फिर देश में ही घटनाओं को अंजाम दिलवाते हैं।

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