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सोनिया गांधी बोलीं- अन्नदाताओं की हालत देखकर मेरा मन बहुत दुखी है, भाजपा को नहीं दिख रही किसानों की पीड़ा

कुछ ने तो सरकार की उपेक्षा के चलते आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लिया। पर बेरहम मोदी सरकार का न तो दिल पसीजा और न ही आज तक प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्री के मुंह से सांत्वना का एक शब्द निकला।

सोनिया गांधी बोलीं- अन्नदाताओं की हालत देखकर मेरा मन बहुत दुखी है, भाजपा को नहीं दिख रही किसानों की पीड़ा
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सोनिया गांधी, फ़ोटो फ़ाइल

केंद्र सरकार के द्वारा लाये गए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन कड़ाके की ठंड और बारिश के मौसम में भी दिल्ली की सीमाओं पर जारी है। किसान आंदोलन का आज 39वां दिन है। विपक्ष भी किसानों के मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहा है। इसी क्रम में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि किसानों की ये हालत देखकर मेरा मन बहुत दुखी है। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप भी लगाया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने वक्तव्य (स्टेटमेंट) में लिखा है कि हाड कंपकपाती ठंड और बरसात में दिल्ली की सीमाओं पर अपनी मांगों के समर्थन में 39 दिनों से संघर्ष कर रहे अन्नदाताओं की हालत देखकर देशवासियों सहित मेरा मन भी बहुत व्यथित है। आंदोलन को लेकर सरकार की बेरुखी के चलते अब तक 50 से अधिक किसान जान गंवा चुके हैं।

कुछ ने तो सरकार की उपेक्षा के चलते आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लिया। पर बेरहम मोदी सरकार का न तो दिल पसीजा और न ही आज तक प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्री के मुंह से सांत्वना का एक शब्द निकला। मैं सभी दिवंगत किसान भाईयों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रभु से उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करती हूं।

आजादी के बाद देश के इतिहास की यह पहली ऐसी अहंकारी सरकार सत्ता में आई है जिसे आम जनता तो दूर, देश का पेट भरने वाले अन्नदाताओं की पीड़ा और संघर्ष भी दिखाई नहीं दे रहा। लगता है कि मुट्ठी भर उद्योगपति और उनका मुनाफ़ा सुनिश्चित करना ही इस सरकार का मुख्य एजेंडा बनकर रह गया है।

लोकतंत्र में जनभावनाओं की उपेक्षा करने वाली सरकारें और उनके नेता लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते। अब यह बिल्कुल साफ़ है कि मौजूदा केंद्र सरकार की थकाओ और भगाओ की नीति के सामने आंदोलनकारी धरती पुत्र किसान मज़दूर घुटने टेकने वाले नहीं हैं।

अब भी समय है कि मोदी सरकार सत्ता के अहंकार को छोड़कर तत्काल बिना शर्त तीनों काले क़ानून वापस ले और ठंड एवं बरसात में दम तोड़ रहे किसानों का आंदोलन समाप्त कराए। यही राजधर्म है और दिवंगत किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी। मोदी सरकार को यह याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र का अर्थ ही जनता एवं किसान - मज़दूर हितों की रक्षा करना है। जयहिंद!

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