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अच्छी खबर: SBI चेयरमैन ने दिया संकेत, कोरोना के चलते गोता खानी वाली देश की अर्थव्यवस्था में दिख रहा सुधार, पढ़ें रिपोर्ट

कोरोना महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बदतर स्थिति में पहुंच गई थी। कोरोना का असर अर्थव्यवस्था पर इतना पड़ा कि इसने सरकार की चिंता में इजाफा कर दिया। पर अब एक अच्छी खबर आ रही है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने उम्मीद जताई है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते गोता खाने वाली देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती का रुख दिख रहा है।

एसबीआई चेयरमैन ने सुनाई अच्छी खबर- कोरोना के चलते गोता खानी वाली देश की अर्थव्यवस्था में दिख रहा सुधार का संकेत
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एसबीआई चेयरमैन दिनेश कुमार खारा

कोरोना महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बदतर स्थिति में पहुंच गई थी। कोरोना का असर अर्थव्यवस्था पर इतना पड़ा कि इसने सरकार की चिंता में इजाफा कर दिया। पर अब एक अच्छी खबर आ रही है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने उम्मीद जताई है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते गोता खाने वाली देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती का रुख दिख रहा है। एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने कहा कि उम्मीद है कि इकोनॉमी अलगे वित्त वर्ष में तेजी की राह पर लौट आएगी।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में बुनियादी बदलवा होगा और अब यह अधिक परिपक्व अर्थव्यवस्था बनेगी क्योंकि आर्थिक इकाइयां लागत को सीमित रखना सीख रही हैं। बता दें कि पिछले महीने ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि इकोनॉमी में सुधार के संकेत तेजी से मिल रहे हैं।

अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के फिर से लौटने की उम्मीद

एसबीआई चेयरमैन खारा बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की वार्षिक आम सभा को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के अप्रैल 2021 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है। आर्थिक इकाइयों के स्वरूप में बदलाव एक सामान्य बात होगी और इनमें से कुछ बदलाव स्थायी होंगे।

कोरोना वायरस ने अर्थव्यवस्था को किया प्रभावित

खारा ने कहा कि कोरोना वायरस ने देश की अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित किया है लेकिन बुरा समय ज्यादा नहीं रहता। हमें अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि गिरावट के दौर से बाहर आने के लिए अर्थव्यवस्था में 'लचीला' रुख दिखा है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत तक कुछ सकारात्मक संकेत दिखने लगे। उनके मुताबिक कंपनियों क्षमता का औसत उपयोग 69 फीसदी है। जबकि कॉरपोरेट की ओर से निवेश मांग बढ़ने में अभी कुछ वक्त लगेगा, नकदी से परिपूर्ण सार्वजनिक निगमों की पूंजीगत व्यय योजना से निवेश मांग बढ़ेगी।

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