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Shyamji Varma Birth Anniversary: जानें कौन हैं स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी वर्मा, जिन्हें पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी 162वीं जयंती (Shyamji Varma Birth Anniversary) पर एक बार फिर याद किया है। उन्हें ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारत के बाहर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अभियान चलाने वालों में प्रमुख थे वर्मा।

Shyamji Varma Birth Anniversary: जानें कौन हैं स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी वर्मा, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि दी
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Shyamji Varma Birth Anniversary pm modi pays tribute shyamji varma know about

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रवादी नेता और स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी 162वीं जयंती (Shyamji Varma Birth Anniversary) पर श्रद्धांजलि दी। उनके जन्मदिवस के मौके पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर उन्हें याद किया है।

ट्वीट कर पीएम मोदी ने लिखा कि देश के महान सपूत श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। देश हो या विदेश, उन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के जरिए स्वतंत्रता के संकल्प को लगातार बल दिया।

आगे लिखा कि आजादी के संघर्ष में उनका योगदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। पीएम मोदी हर साल स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

जानें कौन हैं भारतीय राष्ट्रवादी नेता और स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा

श्यामजी कृष्ण वर्मा की पहचान एक कट्टर राष्ट्रवादी नेता के रूप में है। उन्होंने लंदन में इंडियन होम रूल सोसाइटी, इंडिया हाउस और द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट की स्थापना की थी। जिसके बाद वो राष्ट्रवादी विचारों के लिए प्रेरणा बन गए। इसी के जरिए उन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन की जमकर आलोचना की।

स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा बॉम्बे आर्य समाज के पहले अध्यक्ष रहे और भारत के कई राज्यों के दीवान के रूप में भी काम किया। दयानंद सरस्वती के प्रशंसक थे।

उनका जन्म 1857 में आधुनिक गुजरात में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भारत में ही हुई थी। उसके बाद वो ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ाने चले गए। इसी दौरान वो लंदन में एक बैरिस्टर बने। साल 1905 में उन्हें ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखने के लिए राजद्रोह का आरोप लगा। जिसके बाद उनकी कानून की प्रेक्टिस पर रोक लगा दी। यह कदम महत्वपूर्ण था क्योंकि इनर टेम्पल की माननीय सोसायटी लंदन में बैरिस्टर और जजों के लिए एक संगठन था।

ब्रिटिश सरकार की आलोचना की वजह से वो इंग्लैंड से पेरिस चले गए और वहां से अपना आंदोलन जारी रखा। दूसरे विश्व युद्ध के फैलने के बाद वह स्विट्जरलैंड में जिनेवा चले गए और वहां अंतिम समय तक वहीं रहे। 30 मार्च 1930 को जिनेवा में उनका निधन हो गया।

श्यामजी वर्मा से जुड़ी खास बातें...

1. बचपन में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। उनकी पढ़ाई लिखाई उनकी दादी ने की।

2. इसी दौरान वो स्वामी दयानंद सरस्वती के संपर्क में आए, जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी। यहीं से उनके मन में राष्ट्रवाद को जन्म मिला।

3. भारत के बाहर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र उन्हें ही मना गया। वो संस्कृत में बहुत अच्छे विद्वान थे और उन्होंने भारत में वकालत भी की थई।

4. उन्होंने दीवान के रूप में कुछ भारतीय रियासतों के लिए काम भी किया।

5. उनकी मृत्यु के वक्त ब्रिटिश सरकार भारत में उनके निधन की खबर को छुपाया गया। लेकिन भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि दी थी।।

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