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SC/ST Act: SC ने केंद्र सरकार को दिखाई 'तुरंत गिरफ्तारी' पर हरी झंडी, जानें क्या था 2018 में कोर्ट का फैसला?

SC/ST Act/ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एससी एसटी एक्ट (SC/ST Ac) के तहत तुरंत गिरफ्तारी पर पर रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को उसके फैसले पर हरी झंडी दिखा दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि समानता और दलितों के नागरिक अधिकारों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

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SC/ST Act/ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Ac) मामले पर सुनवाई के दौरान अपना फैसला बदलते हुए कहा कि अब तुरंत गिरफ्तारी होगी। कोर्ट में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक, अब इस एक्ट के तहत शिकायत होने के बाद तुरंत गिरफ्तारी हो सकेगी। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए तुरंत गिरफ्तारी पर रोक हटा दी थी। जिसके बाद एसी एसटी समाज के लोगों ने जमकर कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कोर्ट ने कहा था कि पहले जांच होगी और फिर गिरफ्तारी होगी।


सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में जारी अपने निर्देशों को पलटते हुए कहा कि समानता के लिए एससी/एसटी लोगों का संघर्ष अभी भी देश में खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों की तुरंत गिरफ्तारी होगी। दलित समाज के लोगों को अभी भी अस्पृश्यता, दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है और सामाजिक रूप से बहिष्कार किया जाता है।

बता दें कि केंद्र की याचिका पर आदेश 18 सितंबर को सुरक्षित कर लिया गया था। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि 2018 का फैसला संविधान की भावना के खिलाफ था और संकेत दिया कि यह कानून के प्रावधानों के अनुसार, समानता में लाने के लिए नया आदेश पारित कर सकते हैं।

क्या था कोर्ट का फैसला?

1. सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2018 में अपने फैसले में कहा था कि तुरंत गिफ्तारी नहीं होगी। पहले जांच होगी फिर गिरफ्तारी होगी।

2. कोर्ट ने कहा था कि सरकारी नौकरी वालों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ एससी/ एसटी एक्ट का काफी गलत इस्तेमाल किया जाता है। कानून के तहत दायर किसी भी शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी।

3. पिछले साल कोर्ट के फैसले के बाद एससी/एसटी संगठनों ने हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया था।

4. कोर्ट ने कहा था कि अगर पहली नजर में मामला आधारहीन लगता है तो ऐसे में तुरंत जमानत मिल जाया करती थी।

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