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RSS का स्थापना दिवस: पांच स्वयंसेवकों से शुरू हुआ था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आज करोड़ों है संख्या

RSS Foundation Day/ आरएसएस (RSS) का हमेशा मानना रहा है कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे। जब समूचे राष्ट्र (Nation) के नागरिक एक सूत्र में बांधे गए हैं तो धर्म के नाम पर कानून (Law) की बात समझ से परे हो जाती है। आरएसएस द्वारा समान नागरिकता संहिता की बात आते ही संघ को सांप्रदायिक (Communal) होने की संज्ञा दी जाती है। लेकिन संघ ने कई मोर्चों पर अपने आपको स्थापित किया है।

RSS का स्थापना दिवस: पांच स्वयंसेवकों से शुरू हुआ था आरएसएस, आज करोड़ों है संख्या
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RSS Foundation Day: RSS Started With Five Volunteers, Crores Of Volunteers Today

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने आज विजया दशमी (Vijaya Dashmi) के मौके पर संगठन का 94वां स्थापना दिवस मनाया। आरएसएस की स्थापना साल 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (Baliram Hedgevar) के द्वारा की गई थी। इस मौके पर आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan bhagwat) ने कहा कि विश्व में शांति और सद्भाव के लिए एक परम भारत की आवश्यकता है। इसके लिए भारत को प्रकृति और संस्कृति की अपनी मजबूत नींव पर खड़ा होना होगा। अच्छी भावना, आचरण और समाज में सामंजस्य स्थापित करना होगा।








आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि इन सभी प्रयासों में संघ स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संघ के स्वयंसेवकों को समय की चुनौतियों को स्वीकार करने और इसके निपटने के लिए काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समग्र प्रगति को प्राप्त करने और समाज की समस्याओं के समाधान ढूंढनें के कार्य को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है। इसे स्पष्ट दृष्टि के साथ ईमानदार प्रयास में पूरे समाज के स्वयंसेवकों की आवश्यकता है।

भागवत ने कहा कि संघ कार्यकार्ताओं को बनाने के लिए काम कर रहा है जो इस कार्य के लिए जन्मजात वातावरण बनाने में सक्षम हैं। समाज में उनके द्वारा की गई गतिविधियों और उनके प्रभाव ने आज यह साबित कर दिया है कि यह हमारे, हमारे परिवार, हमारे देश और हमारी दुनिया को खुश रखने का सही तरीका है।

आरएसएस का इतिहास

आरएसएस की स्थापना साल 1925 में नागपुर (ब्रिटिश भारत) में की गई थी। आरएसएस के दावे के मुताबिक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी और गैर सरकारी संगठन है। आरएएस को व्यापक रूप से भाजपा का मूल संगठन माना जाता है और भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक है। केशव बलिराम हेडगेवार ने जब आरएसएस की स्थापना की थी तब उनके साथ केवल पांच लोग थे। आज देश और दुनिया में आरएसएस के स्वयंसेवकों की संख्या करोड़ों में है।



इस संगठन का गठन हिंदू परंपरा के माध्यम से चरित्र प्रशिक्षण प्रदान करना और हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हिंदू समुदाय को एकजुट करना था। आरएसएस भारतीय संस्कृति और एक सभ्य समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है और हिंदुत्व की विचारधारा को हिंदू समुदाय में मजबूत करने का काम करता है।

तीन बार लगा प्रतिबंध

आरएसएस पर ब्रिटिस शासन के दौरान एकबार प्रतिबंध लगाया गया था। आजादी के बाद भारत सरकार ने आरएसएस को तीन (महात्मा गांधी की हत्या, आपातकाल और बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान) बार प्रतिबंधित किया।

आरएसएस का हमेशा मानना रहा है कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे। जब समूचे राष्ट्र के नागरिकएक सूत्र में बांधे गए हैं तो धर्म के नाम पर कानून की बात समझ से परे हो जाती है। आरएसएस द्वारा समान नागरिकत संहिता की बात आते ही संघ को सांप्रदायिक होने की संज्ञा दी जाती है। लेकिन संघ ने कई मोर्चों पर अपने आपको स्थापित किया है।

राष्ट्रीय आपदा के समय संघ कभी यह नहीं देखता कि किसकी आपदा मे फसा हुआ व्यक्ति किस धर्म का है। आपदा के समय केवल राष्ट्र धर्म का पालन करता है कि आपदा में फंसा हुआ अमुख भारत माता का बेटा है। गुजरात में आये भूकम्प और सुनामी जैसी घटनाओ के समय सबसे आगे अगर किसी ने राहत कार्य किया तो वह संघ का स्वयंसेवक था। अब तक छह संघ-संचालक आरएसएस की बागडोर संभाल चुके हैं।



राजनीति में आरएसएस कार्यकर्ता

आरएसएस का प्रभाव यहीं तक नहीं है। आरएसएस ने देश के नेतृत्व के लिए दो प्रधानमंत्री भी दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी आरएसएस के कार्यकर्ता थे और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी आरएसएस के स्वंयसेवक रहे हैं। इसी तरह आरएसएस के अनेक स्वयंसेवक सरकार में छोटे से बड़े स्तर पर मंत्रियों के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रेरित संगठन स्वयं को संघ परिवार का सदस्य बताते हैं। भाजपा, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, सेवा भारती, राष्ट्रीय सेविका समिति, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल, विद्या भारती, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, विश्व संवाद केंद्र आदि संघ परिवार से ही संबद्ध हैं।

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