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काल का गाल है यमुना एक्सप्रेस वे, अब तक हुई 944 मौत

भारत में सड़क निर्माण को लेकर भले तेजी दिखाई गई है पर अभी भी ज्यादातर हादसे खस्ताहाल सड़क की वजह से ही होते हैं। 2018 में हिमाचल के कांगड़ा में एक बस पलटी और 24 स्कूली बच्चों की मौत हो गई। इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन ने पूरे मामले की जांच की और रिपोर्ट में कहा कि हादसें में सिर्फ ड्राइवर की गलती नहीं थी

Road Accident In India Report
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Road Accident In India Report According Every Year 10 Thousand People Died

उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना एक्सप्रेस-वे (Yamuna Expressway) पर सोमवार को एक बस नीचे नाले में गिर पड़ी जिसमें 30 लोगो की मौत हो गई। पिछले महीने की 22 जून को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक बस खाई में गिरी और 40 से ज्यादा लोग काल के गाल में समा गए। उसके कुछ दिन बाद ही हिमाचल में एक स्कूल बस पलटी जिसमें 4 बच्चों की मौत हो गई। ऐसे ही बस हादसों में 2-3 मौते होना एकदम नार्मल हो गया है।

बस हादसों के बाद मुख्यता ड्राइवर पर दोष दिया जाता है कि उसने बस चलाने में गलती की जिसकी वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ। इसके बाद पुलिस उसके खिलाफ केस करके मामले को रफा दफा कर देती है। बस हादसों का कारण महज ड्राइवर ही नहीं बल्कि बस की कंडीशन और खराब सड़क भी हैं। भारत में एक तरफ जहां वोल्वो बसे चलती हैं तो दूसरी तरफ सरकारी खटारा बसे भी। जो कब कहां धोखा दे जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता।

सड़क हादसों में 2015 से लेकर 2017 तक देश में करीब 11,000 लोगों की असमय मौत हुई है। अकेले उत्तर प्रदेश की बात करें तो 2017 में 1406 और 2018 में 1684 लोगों की मौत सड़क हादसें में हुई। इसमें भी एक सबसे विचित्र बात ये कि जिस एक्सप्रेस वे को जनता की सहुलियत के लिए बनाया गया है वही अब मौत का कारण बन रहे हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे पर 2012 के बाद अब तक 5 हजार से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं जिनमें करीब साढ़े नौ सौ लोग मारे गए हैं।


भारत में सड़क निर्माण को लेकर भले तेजी दिखाई गई है पर अभी भी ज्यादातर हादसे खस्ताहाल सड़क की वजह से ही होते हैं। 2018 में हिमाचल के कांगड़ा में एक बस पलटी और 24 स्कूली बच्चों की मौत हो गई। इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन ने पूरे मामले की जांच की और रिपोर्ट में कहा कि हादसें में सिर्फ ड्राइवर की गलती नहीं थी बल्कि सड़क भी जिम्मेदार थी। खराब सड़को पर बस चलाते हुए ड्राइवर का दिमाग बांट जाता है जिससे ऐसे हादसे हो जाते हैं।

बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे का एक बड़ा कारण ओवरलोडिंग भी है। तेलंगाना में पिछले साल हुए एक सड़क हादसे में 60 लोगों की मौत हुई थी। बस में निर्धारित लोगों से दोगुने लोग बस में सवार थे। इससे बस के इंजान के साथ ड्राइवर को भी ज्यादा जोर लगाना होता है। हर हादसों के बाद प्रशासन घटना पर दुख जताते हुए इसकी पुनर्रावृत्ति न हो इसके लिए कड़ाई करता है पर ये कड़ाई कुछ दिन बाद ही गायब हो जाती है।

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