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राजनाथ सिंह बोले- एसआईडीएम ने अपना पहला ऑफिस लखनऊ में स्थापित किया, ये तीन उद्योग दुनिया में हैं मशहूर

आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन हमारे देश की जीवन-चर्या का अनिवार्य अंग रहे हैं। घर के काम हों या खेती-किसानी, शिक्षा-दीक्षा हो या आजीविका, यहाँ तक की रक्षा क्षेत्र और व्यापार में भी हमारा देश बहुत उन्नत रहा है, वह भी स्वावलंबन के दम पर।

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केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आज सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सत्र को संबोधित किया। आरएमओ के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने कहा कि अपने विस्तार की प्रक्रिया में, SIDM ने अपना पहला state office, लखनऊ में set-up कर लिया है। इसी तरह Uttar Pradesh Expressway Industrial Development Authority के साथ, UP defence corridor में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन हमारे देश की जीवन-चर्या का अनिवार्य अंग रहे हैं। घर के काम हों या खेती-किसानी, शिक्षा-दीक्षा हो या आजीविका, यहाँ तक की रक्षा क्षेत्र और व्यापार में भी हमारा देश बहुत उन्नत रहा है, वह भी स्वावलंबन के दम पर। जिनकी रूचि इतिहास में होगी, वह जानते होंगे कि भारत में औद्योगिक स्थिति और संभावनाओं का जायजा लेने के लिए अंग्रेजों ने 1916 में 'Indian Industrial Commission' गठित किया था।

इस कमीशन का उद्देश्य यह दिखाना था, कि उद्योगों के मामले में भारत कितना अयोग्य और अक्षम है। लगभग 300 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में वह यह दिखाने में काफी हद तक सफल भी रहा। पर फिर भी, एक दो महत्वपूर्ण बातें इस रिपोर्ट से जुड़ी हैं, जिसे मैं संक्षेप में आपके सामने रखना चाहूंगा। रिपोर्ट के पहले भाग के, पहले चैप्टर में वे एक बात लिखते हैं, ऐसे समय में जब यूरोप के पश्चिम में, आधुनिक औद्योगिक व्यवस्था का जन्मस्थान, असभ्य जनजातियों का निवास था, भारत अपने शासकों की संपत्ति और अपने शिल्पकारों के उच्च कलात्मक कौशल के लिए प्रसिद्ध था।

उन्होंने तीन industries के नाम गिनाए, जिनके लिए भारत पूरी दुनिया में जाना जाता था। वह तीन areas थे- Textile उद्योग, Iron उद्योग, और Ship building उद्योग। हमारी Ship-building न केवल स्थानीय जरूरतों, बल्कि हमारी सुरक्षा और व्यापार का प्रमुख आधार थी। कमीशन के इस रिपोर्ट के जवाब में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने लगभग 50 पृष्ठों का एक independent 'note' लिखा। इसमें बड़े तर्कों, और अंग्रेज विद्वानों के ही दिए तथ्यों से उन्होंने यह दिखाया, कि भारत शुरू से ही व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में से एक रहा है।

आज जब मैं 'Technology/product innovation' और 'Export performance' Categories में Ship-building entities को अवार्ड लेते देख रहा हूं, तो मुझे हमारे देश का वही गौरव फिर से वापस आता दिखाई दे रहा है। आप सभी अवगत हैं, कि वैश्विक परिस्थितियाँ आज बड़ी तेजी से बदल रही हैं। आज दुनिया का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इन बदलावों से प्रभावित न हुआ हो। ट्रेड, इकोनामी, कम्युनिकेशन, political equation और military power, सब पर इसका साफ असर देखा जा सकता है।

दुनिया में ऐसे defence manufacturers की कमी नहीं है, जो अत्याधुनिक और high quality के equipment बनाते हैं। पर उनकी cost ज्यादा होती है। ऐसे भी manufacturers की कमी नहीं होगी, जिनकी cost कम है पर गुणवत्ता उतनी नहीं है। ऐसे में मैं देखता हूं, कि आज हमारे देश के पास वह सब कुछ है, जो इन दोनों का perfect blend तैयार कर सकता है। यानी quality भी, भी और किफायती भी। यह न केवल भारत की अपनी सुरक्षा के लिए लाभकारी होगा, बल्कि दुनिया को सुरक्षा उपकरण निर्यात करने की दिशा में हमें आगे ले जाएगा।

आज जब हम अपनी आजादी का 'अमृत महोत्सव' मना रहे हैं, तो इससे अच्छा अवसर क्या होगा, कि हम एक बार फिर 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के अपने संकल्प पर काम करें। हम अपने अतीत से सीखते हुए, वर्तमान पर काम करते हुए, भविष्य को सशक्त बनाएँ। आप लोगों द्वारा हमें अनेक valuable suggestions भी मिले हैं जिन्हें हमने policy reforms में शामिल किया है। DAP-2020, Draft DPM 2021, draft DPEPP 2020 और दोनों indigenisation list का finalisation इसके बड़े उदाहरण हैं।

इसके अलावा भी सरकार द्वारा अनेक ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो हमारी private industry की requirements तो पूरी करेंगे ही, साथ ही global demands पूरी करने के लिए विदेशी साझेदार manufacturers के साथ sustainable और long-term linkages भी create करेंगे। यह सब के लिए बड़ी बात है कि Defence modernisation के लिए आवंटित राशि में domestic procurement का percentage बढ़ाकर 64.09% कर दिया गया है। साथ ही domestic capital procurement में निजी क्षेत्रों से direct procurement का percentage 15 फ़ीसदी कर दिया गया है।

हम निजी क्षेत्र को एक suitable growth environment प्रदान कर रहे हैं। इसके अनुसार, हमने strategic partnership Model के माध्यम से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों सहित Mega Defence Programme के निर्माण के अवसर खोले हैं। भारत सरकार ने नए रक्षा औद्योगिक लाइसेंस की मांग करने वाली कंपनियों के लिए automatic route के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में 74% तक और government route द्वारा 100% तक FDI को बढ़ाया है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणाम आज हमारे सामने हैं। जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा, SIDM के साथ लगभग 500 members इन्हीं नीतियों के परिणाम हैं। पिछले 7 वर्षों में हमारे defence export का, 38 हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर जाना इन्हीं नीतियों के परिणाम हैं। 10,000 से ऊपर SMEs का defence सेक्टर से जुड़ना, इन्हीं के परिणाम है। आज defence सेक्टर में research & development, start-up, innovation और employment बढ़ा है, यह सब इन्हीं के परिणाम हैं।

मैं समझता हूँ कि sustainibility हमारे self-reliance का अभिन्न अंग है। इसलिए नए-नए उभरते defence के क्षेत्रों जैसे space, Aerospace, और Cyberspace में भी आप लोग रूचि लें। मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं, कि आने वाले समय में भारतीय रक्षा के इतिहास में जब defence production revolution का जिक्र होगा, तो आप सबका और SIDM का नाम अपने आप लोगों की जुबान पर आएगा। हमें बस आगे बढ़ते रहना है।

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