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PM Modi Interview : अक्षय के सवाल, मोदी के जवाब- यहां फंसा पेंच

अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम मोदी मोदी का पूरी तरह से गैर राजनीतिक इंटरव्यू किया। जिसमें पहली बार वो राजनीतिक बातों से दूर व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बातों पर बात की।

PM Modi Interview : अक्षय के सवाल, मोदी के जवाब- यहां फंसा पेंच

अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम मोदी मोदी का पूरी तरह से गैर राजनीतिक इंटरव्यू किया। जिसमें पहली बार वो राजनीतिक बातों से दूर व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बातों पर बात की। पीएम ने विरोधी दलों और निजी जीवन से जुड़ी कई बातों पर खुलकर बोले। वहीं पीएम से उनकी इच्छाओं के बारे में भी पूछा।

अक्षय: एक बार मेरे ड्राइवर की बेटी से मैंने पूछा कि मोदी जी मिलें तो क्या सवाल करोगी? उसने कहा- क्या हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं, खाते हैं तो कैसे, काटकर या गुठली के साथ?

मोदी: आम खाता हूं। यह मुझे पसंद भी है। गुजरात में आम रस की परंपरा है। छोटा था तो आम-वाम खरीदना, उस तरह की हमारी फैमिली लक्जरी तो थी नहीं। बचपन में पेड़ से पके आम तोड़कर खाना पसंद था। बाद में आम रस खाने की आदत लगी। लेकिन अब मुझे कंट्रोल करना पड़ता है कि खाऊं या नहीं।

अक्षय: कभी सोचा था कि प्रधानमंत्री बनेंगे? यह विचार कब आया?

मोदी: मैंने कभी नहीं सोचा था कि पीएम बनूंगा। जो मेरा फैमिली बैकग्राउंड है उसमें मुझे कोई अच्छी सी नौकरी भी मिल जाती तो मां पड़ोसियों को गुड़ खिला देती। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि देश मुझे इतना प्यार क्यों दे रहा है।

अक्षय: आप संन्यासी बनना चाहते थे? सेना में जाना चाहते थे

मोदी: जिस पर पीएम मोदी ने कहा-कभी फौज वाले यूनिफॉर्म में निकलते थे तो मैं उन्हें देखता था। उन्हें कभी बच्चे की तरह खड़े होकर सैल्यूट कर देता था। उतने में 1962 का वॉर हो गया तो मन में हो गया, ये देश के लिए जीने-मरने वाला रास्ता है। इतने में एक बार मैंने कहीं पढ़ा गुजरात में कोई सैनिक स्कूल है कि उसमें आप दाखिल हो सकते हैं पिताजी को कहा…ऐसा-ऐसा है मैं वहां जाना चाहता हूं उन्होंने कहा– अपने पास पैसे कहां हैं। तुम कहां पढ़ने जाओगे जामनगर? जामनगर तक कौन ले जाएगा तुम्हें?

गुस्से को कैसे शांत करते हैं पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने बताया कि अगर कोई ऐसी घटना होती है, जो उन्हें पसंद न आए तो वो अकेले कागज लेकर बैठ जाते थे। उस घटना का वर्णन लिखते थे, क्या हुआ, क्यों हुआ? फिर उस कागज को फाड़कर फेंक देते थे। इसके बाद भी मन शांत नहीं होता था तो दोबारा उस घटनाक्रम को लिखते थे। इससे उनकी सारी भावनाएं लिखने के बाद जल जाती हैं। इससे ये भी एहसास हो जाता है कि वह भी गलत हैं।

अक्षय: क्या विपक्ष में आपके दोस्त है?

मोदी: आपको हैरानी होगी, इससे शायद मुझे चुनाव में नुकसान होगा। लेकिन ये ममता दीदी साल में आज भी मेरे लिए एक-दो कुर्ते भेजती हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी साल में 3-4 बार खास तौर पर ढाका से मिठाई भेजती हैं। ममता दीदी को पता चला तो वो भी साल में एक-दो बार मिठाई जरूर भेज देती हैं।

पीएम मोदी ने कहा, 'हम लोग साल में एक दो बार साथ में बैठकर खाना भी खाते हैं। खैर वह फॉर्मल होता है। बहुत पहले की बात है। तब तो मैं सीएम भी नहीं था। तब मैं किसी काम से पार्लियामेंट गया हुआ था। वहां गुलाम नबी आजाद और मैं बड़े दोस्ताना अंदाज में गप्पे मार रहे थे। फिर हम बाहर निकले, मीडिया वालों ने पूछा-अरे आप लोग ऐसे कैसे बात कर रहे हो, तुम तो आरएसएस वाले हो, गुलाम नबी आजाद से तुम्हारी दोस्ती कैसे हो गई। फिर गुलाम नबी ने अच्छा जवाब दिया। हम दोनों वहीं खड़े थे। वो बोले- देखो भाई बाहर आप लोग जो सोचते हो वैसा नहीं है। शायद हम लोग फैमली के रूप में जितने जुड़े हुए हैं, सभी दल के लोग, वो शायद आप लोग सोच नहीं सकते हैं।

अक्षय: बैंक अकाउंट में कितने पैसे हैं?

मोदी: जब मैं गुजरात से CM बना तो मेरा बैंक अकाउंट नहीं था। जब MLA बना तो सैलरी आने लगी। स्कूल में देना बैंक के लोग आए थे। उन्होंने बच्चों को गुल्लक दिया और कहा कि इसमें पैसे जमा करें और बैंक में जमा कर दें। लेकिन हमारे पास होता तब तो डालते। तब से अकाउंट यूं ही पड़ा रहा।

अक्षय: आप मां के साथ नहीं रहना चाहते?

मोदी: मैं पीएम बनकर घर से निकला होता तो लगता कि सब मेरे साथ रहें। लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में वह सब छोड़ दिया। मैं घर छोड़कर निकल गया तो मेरी ट्रेनिंग वैसी हुई। लेकिन फिर भी मैंने मां को बुला लिया था। कुछ दिन उनके साथ बिताए। लेकिन मां कहती थी, क्यों अपना समय खराब करते हो। जितने दिन मां रही, मैं अपने शेड्यूल में ही लगा रहता था। रात को 12 बजे आता तो मां को दुख होता कि ये क्या कर रहा है।

अक्षय: जब आप मुख्यमंत्री थे तब मिला था तब मैंने आपको एक-दो चुटकुले सुनाए थे। क्या पीएम बनने के बाद भी आपका वैसा ही ह्यूमर है? आपकी छवि बेहद स्ट्रिक्ट नजर आती है।

मोदी: मेरी यह छवि गलत तरीके से पेश की गई है। ऑफिस जाता हूं, तो खुद काम करता हूं तो दूसरों को भी लगता है कि ये करते हैं तो हमें भी करना चाहिए। कई बार रात 11 बजे फोन करके पूछता हूं कि फलां काम हुआ कि नहीं। मैं काम के वक्त काम करता हूं। इधर-उधर की बात में वक्त बर्बाद नहीं करता। मेरी मीटिंग में कोई मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता। मेरा फोन भी नहीं आता। जहां तक ह्यूमर का सवाल है। मेरे परिवार में पिताजी कभी नाराज हों तो मैं एक-दो मिनट में ही माहौल को हल्का कर देता था।

अक्षय: सुना है आपने अपनी जमा पूंजे के 21 लाख रुपए भी बच्चियों के लिए दान कर दिए थे?

मोदी: मैंने अपने सेक्रेटरी की बच्चियों की मदद के लिए गुजरात सरकार को 21 लाख रुपए दिए। सरकार की तरफ से विधायक को कम पैसे में प्लॉट मिलता है। मैंने वह भी पार्टी को ले लेने के लिए कहा।

अक्षय: सुना है गुजराती पैसों के लिए बहुत सही रहते हैं, लेकिन आपने अपने पैसे दे दिए, प्लॉट दे दिया? आपको एक चुटकुला सुनाता हूं। एक गुजराती बुजुर्ग आदमी मर रहा होता है। तो पूछता है मेरा लड़का कहां है? बेटा कहता है- मैं यहां हूं। बुजुर्ग पूछता है- मेरी बेटी कहां है? वह कहती है- मैं यहां हूं। मेरी बीवी कहां है? वह कहती है- मैं यहां हूं। तो बुजुर्ग कहता है- फिर दुकान पर कौन है?

मोदी: एक मैं भी सुना दूं। एक बार ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर कोई पैसेंजर सोया था। स्टेशन आया तो खिड़की से बाहर छांककर जाते हुए व्यक्ति से पूछा- कौन सा स्टेशन आया? उसने कहा चार आना दोगे तो बताऊंगा। इस पर यात्री ने कहा- रहने दे, अहमदाबाद आया होगा।

अक्षय: क्या हमारे प्रधानमंत्री को गुस्सा आता है? आता है तो किस पर और कैसे निकालते हैं?

मोदी: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मेरे लिए कभी कोई कहेगा की मुझे गुस्सा आता है ये सरप्राइज होगा। राजी, नाराजगी और गुस्सा ये सब जीवन का हिस्सा है। मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता।' इसी तरह प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'कभी मेरे मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं, और मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड हैं उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गांव को गुड़ खिला देती।

चाय ने सिखाई हिंदी

चाय बेचते हुए बहुत लोगों को समझने का मौका मिला। कई लोग डांटते थे। जब हिंदी में बात करता था तो बीजेपी के नेता हैरान होते थे। क्योंकि मैं गुजराती था। इसका कारण चाय बेचना ही था। मालगाड़ी से मुंबई के कारोबारी आते थे, हम उन्हें चाय पिलाते थे। उनसे बातें करते-करते हिंदी सीख ली।

अक्षय: यूनाइटेड नेशन में स्पीच देते हुए क्या आप नर्वस थे?

पीएम ने कहा कि जब मैं अमेरिका पहुंचा तो वहां सुषमा जी पहले से पहुंची थी। सुषमा जी ने भाषण को लेकर पूछा तो मैंने बोला कर लेंगे। तो वो अड़ गई। लोगों ने कहा कि लिखित स्पीच होनी चाहिए। लेकिन मैंने तो लिखा नहीं था। लेकिन वे लोग जीद करने लगे। जिसके बाद मैंने उनको बताया कि क्या क्या मुझे बोलना है। जिसके बाद उसे लिख कर दिया गया। लिख कर बोलने में मुझे दिक्कत होती है।

साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि मुझे सुबह 5 बजे चाय पीने की आदत है और शाम को 6 बजे भी मुझे चाय की आदत है। शाम वाली चाय की तलब उन्हें लगती है। उनकी इच्छा खुले में अकेले बैठकर चाय पीने की रहती है। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि पहले वह खुद के मिलने के लिए अपना घर छोड़ देते थे और अकेले एकांत के लिए घूमते रहते थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'पहले मैं दिवाली मनाता नहीं था। मैं दिवाली में 4-5 दिन कहीं चला जाता था। इस समय के लिए अपनी जरुरत के हिसाब से पानी इत्यादि जरुरी सामान रख लेता था जो खुद मैं उठा सकता था। लेकिन निकलने से पहले मैं काफी सर्च कर लिया करता था और फिर मैं निकल जाता था। जंगलों में या जहां इंसान न हो, पीने का पानी उपबल्ध हो बस। मैं रेडियो भी नहीं रखता था। संचार का कोई साधन नहीं रखता था। मैं बस प्रकृति को देखता रहता था। मेरे उस कार्यक्रम का नाम था, 'मैं मुझसे मिलने जाता हूं।'

अक्षय: आपको अगर अलादीन का चिराग मिल जाए तो क्या करेंगे?

मोदी: मैं तो मांगूंगा कि जितने भी समाजशास्त्री हैं उनके दिमाग में भर दे कि वे बच्चों को अलादीन वाली कहानी सुनाना बंद कर दें। बच्चों को मेहनत करना सिखाएं।

अक्षय: सीएम से पीएम बने तो इस घर में सबसे वैल्युएबल चीज क्या लाए थे?‌

मोदी: शायद इससे पहले दूसरे प्रधानमंत्रियों को यह लाभ नहीं मिला जो मुझे मिला। वह यह है कि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनकर आया। मैं गुजरात का सबसे लंबा समय तक रहा मुख्यमंत्री था। यह तजुर्बा शायद किसी को नहीं मिला। देवेगौड़ा साहब मुख्यमंत्री रहे थे, लेकिन कम समय के लिए। मैं मान सकता हूं कि यह चीज मैं वहां से लेकर आया जो देश के काम आ रही है।

अक्षय: आप साढ़े तीन घंटे ही सोते हैं। इतना कम क्यों?

मोदी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी मुझसे मिले तो यही कहा- आप ऐसा क्यों करते हैं? लेकिन मैं कहता हूं कि कम समय में भी मेरी नींद पूरी हो जाती है। अगर मैं राजनीति से रिटायर हुआ तो यह खोजने का प्रयास करुंगा कि अधिक नींद कैसे लूं।

अक्षय: जुकाम होता है तो क्या करते हैं,

जुकाम होने पर वो 3 काम करते हैं। पहला- जुकाम के समय वह सिर्फ गरम पानी ही पीते हैं. दूसरा- वह फास्टिंग करते हैं, यानी 24 से 28 घंटे बिना खाए सिर्फ गरम पानी पीकर ही रहते हैं। तीसरा- गरम सरसों की तेल की कुछ बूंदें अपनी नाक में डालते हैं। नरेंद्र मोदी ने आगे बताया, 'मैं बहुत कठिन जिंदगी जीकर यहां तक आया हूं। मैं आयुर्वेद में विश्वास रखता हूं। उन्होंने थकान को लेकर बताया, मैं गमछा पैर पर बांधता था और बीच में छोटी लकड़ी पैर पर लगाता था, जिससे प्रेशर आता था। इस तरह पूरी बॉडी की मैं खुद मसाज करता था।'

अक्षय: आपको कौन सा खेल पंसद है?

पीएम मोदी ने कहा कि मैं बचपन से संघ की शाखा में जाता था। वहां शाखा में वैज्ञानिक खेल जाते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि खेल अकेले नहीं बल्कि समूह में खेलना चाहिए। इसमें आपको लीड करने का मौका मिलता है। इससे विकास भी होता है। संघ की शाखाओं में जो खेल होते हैं उससे टीम भावना विकसित हुई। जिंदगी जीने के लिए सामूहिक खेल खेलना चाहिए।

अक्षय: अपने गिल्ली डंडा खेला है

मोदी: मोदी ने कहा कि हां खेला है। लेकिन उन्हें अधिकतर तैरना पसंद था। घर के सभी कपड़े मोदी ही धोते थे।

अक्षय: आप अपनी सैलरी में से परिवार को कुछ देते हैं?

पीएम मोदी ने कहा कि मेरी मां ही मुझे पैसे देती हैं। उन्होंने कहा कि मेरी सैलरी से परिवार को कुछ नहीं जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे मेरी मां से प्यार नहीं है। मेरी मां मुझसे कोई अपेक्षा नहीं रखती हैं। उन्होंने कहा कि मेरा परिवार कोई सरकारी खर्च नहीं लेता है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए देश ही परिवार ही बन गया है।

अक्षय ने पूछा कि आपको लेकर कई मीम्स बनते हैं तो आपको कैसा लगता है

मोदी ने कहा कि मैं इन्हें एंजॉय करता हूं। मैं इनमें मोदी को कम को देखता हूं और क्रिएटिविटी पर ध्यान देता हूं। इसमें जो क्रिएटिविटी जो होती है वो कमाल की होती है। सोशल मीडिया का सबसे बड़ा फायदा है कि मुझे आम इंसान के सेंस के बारे में पता चलता है। कुछ लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं उस समय आप खुद को संतुलित रखें। इससे उस व्यक्ति का उद्देश्य फेल हो जाता है। लेकिन अगर आप उस पर रिएक्ट करेंगे तो उसे मजा आता है। इसलिए इन्हें देखकर रिएक्ट न करें।

कपड़े और फैशन को लेकर मोदी ने कहा कि "आपने मुझे मेरे फैशन के लिए पूछा। ये बात सही है कि ढंग से रहना ये मेरी प्रकृति थी। शायद एक कारण ये भी था कि गरीबी के कारण कभी-कभी छोटा महसूस करता था लोगों के बीच।

पीएम मोदी ने अपनी ड्रेसिंग सेंस को लेकर बताया कि जब मैं छोटा था तब कुर्ता बड़ा होता था और धोने में महनत लगती थी। इसलिए मैंने कुर्तें को थोड़ा काट दिया। कुर्ता बैग में भी ज्यादा जगह लेता था। ये भी एक वजह थी। अब ये फैशन बन गया है। शायद सायकलोजी पढ़ी होगी बचपन में। हमारे घर में वो प्रेस तो थी नहीं तो मैं क्या करता था कि लोटे में गर्म कोयला भर लेता था और उसी से कपड़ों को प्रेस करता था, और पहन कर जाता था।

अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया से जुड़े पीएम मोदी से एक सवाल किया था। जिसका जवाब देते हुए पीएम ने कहा, 'मैं सोशल मीडिया पर बारीकी से नजर रखता हूं। आपके सोशल मीडिया अकाउंट को भी देखता हूं, आपकी पत्नी ट्विंकल जी के भी… ट्विंकलजी ट्विटर पर सारा गुस्सा मुझ पर निकालती रहती हैं… चलो अच्छा है इससे आपके घर में तनाव नहीं होता होगा। सारा गुस्सा ट्विटर पर मुझ पर ही निकाल देती हैं तो घर में काफी शांति रहती होगी।

अक्षय: आप घड़ी उल्टी क्यों पहनते हैं?

पीएम मोदी ने इसके जवाब में कहा कि ऐसा मैं इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे बार-बार टाइम देखना होता है। जब किसी मीटिंग में या किसी के साथ बैठा होता हूं तो सामने वाले को मेरा ऐसा करना बुरा लग सकता है। इसीलिए उल्टी घड़ी में आसानी से वक्त दिख जाता है और सामने वाले को पता भी नहीं चलता

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