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जनऔषधि दिवस : पीएम मोदी कोरोना वायरस को लेकर बोले, पूरी दुनिया में नमस्ते की एक आदत डल रही

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना यानि PMBJP, इसी की एक अहम कड़ी है। ये देश के हर व्यक्ति तक सस्ता और उत्तम इलाज पहुंचाने का संकल्प है। मुझे बहुत संतोष है कि अब तक 6 हज़ार से अधिक जन औषधि केंद्र पूरे देश में खुल चुके हैं।

Coronavirus: सरकार ने बदला फैसला, कोरोना वायरस से मरने वालों के परिवारों को नहीं मिलेगा 4 लाख का मुआवजापीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना' के लाभार्थियों से बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी को दूसरे जन औषधि दिवस की बहुत-बहुत बधाई! आज सप्ताह भर से मनाए जा रहे जन औषधि सप्ताह का भी आखिरी दिन है।

इस प्रशंसनीय पहल के लिए भी आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन। जनौषधि दिवस केवल एक योजना मनाने का दिन नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों, लाखों परिवारों के साथ जुड़ने का दिन है, जिन्हें इस योजना के कारण बड़ी राहत मिली है।

जन औषधि केंद्र पूरे देश में खुल चुके

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना यानि PMBJP, इसी की एक अहम कड़ी है। ये देश के हर व्यक्ति तक सस्ता और उत्तम इलाज पहुंचाने का संकल्प है। मुझे बहुत संतोष है कि अब तक 6 हज़ार से अधिक जन औषधि केंद्र पूरे देश में खुल चुके हैं।

जैसे जैसे ये नेटवर्क बढ़ रहा है, वैसे ही इसका लाभ भी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच रहा है। आज हर महीने 1 करोड़ से अधिक परिवार इन जन औषधि केंद्रों के माध्यम से बहुत सस्ती दवाइयां ले रहे हैं।

जन औषधि परियोजना से पहले की तुलना में इलाज पर खर्च बहुत कम हो रहा है। अभी तक पूरे देश में करोड़ों गरीब और मध्यम वर्ग के साथियों को 2000-2500 करोड़ रुपए की बचत जन औषधि केंद्रों के कारण हुई है।

पूरी दुनिया में नमस्ते की एक आदत डल रही

पीएम मोदी ने कोरोना वायरस को लेकर कहा कि कोरोना वायरस को लेकर में सभी देशवासियों से प्रार्थना करता हूं कि किसी भी तरह की अफवाह से बचें। कोई भी परेशानी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लें।

पूरी दुनिया में नमस्ते की एक आदत डल रही है, अगर किसी कारण से हमने ये आदत छोड़ दी है, तो हाथ मिलने के बजाए इस आदत को फिर से डालने का ये उचित समय है।

जेनेरिक दवाओं को लेकर अफवाहें फैलाएं जाती हैं

जेनेरिक दवाओं को लेकर अफवाहें फैलाएं जाती हैं। पुराने अनुभवों के आधार पर कुछ लोगों को ये भी लगता है कि आखिर इतनी सस्ती दवा कैसे हो सकती है, कहीं इसमें कोई खोट तो नहीं है।

कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर डॉक्टर जेनेरिक दवाएं ही लिखें, ये सुनिश्चित करना जरूरी है। मेरा आप सभी लाभार्थियों से भी निवेदन रहेगा कि अपने अनुभवों को अधिक से अधिक साझा करें। इससे जन औषधि का लाभ ज्यादा मरीजों तक पहुंच सकेगा।

12 हजार करोड़ रुपये जनता के बचे

आज 1,000 से ज्यादा जरूरी दवाओं की कीमत नियंत्रित होने से करीब साढ़े 12 हजार करोड़ रुपये जनता के बचे हैं। करीब 90 लाख गरीब लोगों को आयुष्मान योजना के तहत लाभ मिला है।

सरकार का प्रयास है कि देश में लोगों को मेडिकल सुविधा के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े। इसलिए देशभर में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए जा रहे हैं, नए मेडिकल कॉलेज बनाये जा रहे हैं, जिससे देश में मेडिकल सीटों में भी बढ़ोतरी हो रही है।

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