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Shyama Prasad Mukherjee Port: श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के नाम से जाना जाएगा कोलकाता पोर्ट, जानें उनके बारे में

Shyama Prasad Mukherjee Port: पीएम मोदी ने कहा कि अब भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से कोलकाता पोर्ट जाना जाएगा।

Shyama Prasad Mukherjee Port: श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के नाम से जाना जाएगा कोलकाता पोर्ट, जानें उनके बारे मेंश्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट

Shyama Prasad Mukherjee Port: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोलकाता बंदरगाह का नाम बदल दिया जाएगा। मोदी ने घोषणा की कि नेताजी इंडोर स्टेडियम में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के समारोह में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाग नहीं लिया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। वह स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।इतना ही नहीं वो श्यामा प्रसाद एक बैरिस्टर थे और शिक्षा को बहुत पसंद किया करते थे। साल 1930 के अंत में अविभाजित बंगाल में खतरनाक राजनीतिक स्थिति ने उन्हें सक्रिय राजनीति में ला खड़ा किया और सिर्फ 14 साल में ही वो राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए।

जानें उनके बारे में

1. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म आएक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। यहीं से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शुरू की इसके बाद वो मैट्रिक परीक्षा पास की औ कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद वकाल की और कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील बन गए।

2. वो सिर्फ 33 साल की उम्र में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने। रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार बंगाली में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

3. 1947 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लॉर्ड माउंटबेटन को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि यदि भारत नहीं था तो भी बंगाल का विभाजन होना चाहिए। उन्होंने 1947 में सुभास चंद्र बोस के भाई शरत बोस और एक बंगाली मुस्लिम राजनेता हुसैन शहीद सुहरावर्दी द्वारा एकजुट और स्वतंत्र बंगाल के लिए एक असफल बोली का विरोध किया।

4. जम्मू-कश्मीर के मुद्दों पर जवाहरलाल नेहरू के साथ मतभेद के कारण उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़ी और 1977-1979 में जनता पार्टी की स्थापना की, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी बन गई।

5. मुखर्जी ने मुस्लिम बहुल पूर्वी पाकिस्तान में अपने हिंदू-बहुल क्षेत्रों को शामिल करने से रोकने के लिए बंगाल के विभाजन की मांग की। वो बंगाल की राजनिती में एक अहम कदम रखते थे।

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