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One Nation One Ration Card: राशन कार्ड प्रिंटिंग के मामले में हुई लाखों की ठगी, सरकार ने कहा नहीं है ऐसी कोई भी योजना

One Nation One Ration Card: एक गिरोह ने लोगों से राशन कार्ड प्रिंटिंग के नाम पर लाखों की ठगी कर ली। जबकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए राशन कार्ड के प्रिंटिंग की सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है।

One Nation One Ration Card: राशन कार्ड प्रिंटिंग के मामले में हुई लाखों की ठगी, सरकार ने कहा नहीं है ऐसी कोई भी योजना
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One Nation One Ration Card: राशन कार्ड प्रिंटिंग के मामले में हुई लाखों की ठगी, सरकार ने कहा नहीं है ऐसी कोई भी योजना

One Nation One Ration Card: वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम के तहत राशन कार्ड की प्रिंटिंग में एक बड़े फर्जीवाड़ा का भंडाफोड़ हुआ है। जिसमें राशन कार्ड की प्रिंटिंग के मामले में लोगों से लाखों की ठगी हुई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस के द्वारा दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कोई राशन कार्ड नहीं हो रहा प्रिंट

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि कोई भी नया राशन कार्ड सरकार के द्वारा प्रिंट नहीं कराया जा रहा है। लेकिन फिर भी कई जगहों से यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों ने दस्तावेज और विजिटिंग कार्ड दिखाकर यह दावा किया है कि राशन कार्ड की प्रिंटिंग का ठेका उन्हें दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी नए राशन कार्ड को छपवाने की अभी कोई योजना नहीं बना रही है।

वहीं केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के राज्यमंत्री दानवे रावसाहब दादाराव ने भी प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि वन नेशन वन कार्ड में सरकार के द्वारा कोई राशन कार्ड प्रिंट नहीं करवाया जा रहा है। लेकिन फिर भी कुछ लोग फर्जी तरीके से लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लाखों की ठगी का भी मामला सामने आया है।

पुलिस ने दी जानकारी

दिल्ली पुलिस के डीएसपी ईश सिंघल ने कहा है कि इस गिरोह में कुल 5 सदस्य हैं। जिसका मास्टर माइंड प्रत्युश राणा है। गिरोह के पांच सदस्यों में से दो को गिरफ्तार किया गया है। ये सब झारखंड की राजधानी रांची के निवासी हैं।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के भगवत साहबराव वेयाल के दोस्त संजय सालिग्राम कोचे ने उन्हें कहा था कि मंत्रालय ने 3 कंपनियों को कार्ड प्रिंट करने की ठेकेदारी दी है। साथ ही उसने ये भी कहा था कि इस प्रिंटिंग का खुदरा ठेका अन्य लोगों को दिया जाएगा। जिसके टेंडर के लिए 10 लाख रुपये भी लिए गए थे। लेकिन जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि भंडाफोड़ हो सकता है, उन लोगों ने 3.5 लाख रुपये वापस कर दिए थे। जिसके बाद भगवत साहबराव वेयाल ने खाद्य मंत्रालय को इस ठगी की सूचना दी थी। जिसके आधार पर छानबीन शुरू की गई थी।

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