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निर्भया रेप केस आरोपियों को 22 जनवरी को नहीं होगी फांसी! ये है कारण

निर्भया रेप केस के आरोपियों को 22 जनवरी को प्रस्तावित फांसी टल सकती है। इसका कारण है राष्ट्रपति के सामने लगायी गई दया याचिका। दया याचिका पर जब तक राष्ट्रपति फैसला नहीं लेते तब तक फांसी नहीं होगी।

निर्भया रेप केस आरोपियों को 22 जनवरी को नहीं होगी फांसी! ये है कारणनिर्भया गैंगरेप के आरोपी (फाइल फोटो)

निर्भया रेप केस के आरोपियों को 22 जनवरी को मिलने वाली फांसी टल सकती है। इसका कारण है राष्ट्रपति के सामने लगायी गई दया याचिका। नियमों के मुताबिक दया याचिका पर फैसला होने तक निर्भया गैंगरेप के आरोपियों को फांसी नहीं दी जाएगी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति फांसी की सजा को माफ कर सकते हैं। संविधान के तहत निर्भया रेप के आरोपियों ने भी राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लगायी है। ऐसे में राष्ट्रपति को अब फैसला लेना होगा कि निर्भया रेप आरोपियों को फांसी दी जाए या न दी जाए। राष्ट्रपति के सामने टेबल पर दया याचिका पहुंच गई है। राष्ट्रपति के फैसला लेने तक आरोपियों को फांसी नहीं होगी।

दूसरी तरफ बेहद कम संभावना है कि याचिका दाखिल करने के 7 दिन के भीतर राष्ट्रपति इसके ऊपर कोई फैसला लें। क्योंकि राष्ट्रपति के सामने दया याचिकाएं सालों साल पड़ी रहती हैं। कई बार राष्ट्रपति अपने पूरे कार्यकाल में भी दया याचिका पर कोई फैसला नहीं लेते हैं।

केआर नारायणन ने नहीं लिया फैसला

पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन ने अपने कार्यकाल में किसी भी दया याचिका का निपटारा नहीं किया। 1997 से 2002 के बीच केआर नारायणन के कार्यकाल में सभी याचिकाएं लंबित रहीं। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सिर्फ दो याचिकाओं के ऊपर ही फैसला किया बाकि याचिकाएं लंबित रहीं।

प्रतिभा पाटिल ने 30 को दी माफी

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सबसे ज्यादा लोगों को माफी दी। जानकारी के मुताबिक प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 30 दया याचिकाएं स्वीकार की थीं। भारत के इतिहास में इतनी दया याचिका किसी भी राष्ट्रपति की तरफ से स्वीकार नहीं की गईं। उस दौरान आरोप लगे कि राजनीतिक कारणों से इतने लोगों की दया याचिकाएं स्वीकार की गईं।

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