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Nirbhaya Case: 16 दिसंबर की वो सर्द रात, जब चलती बस में हुआ था गैंगरेप, 7 साल बाद मिला इंसाफ

Nirbhaya Case: 16 दिसंबर 2021 की वो काली रात जब एक लड़की का चलती बस में गैंगरेप हुआ, इस घटना ने पूरे समाज को कलंकित किया। इसी साथ निर्भया के सभी आरोपियों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई।

Nirbhaya Case: 16 दिसंबर की वो सर्द रात, जब चलती बस में हुआ था गैंगरेप, 7 साल बाद मिला इंसाफ
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निर्भया कांड

Nirbhaya Case: 16 दिसंबर 2021 की वो काली रात जब एक लड़की का चलती बस में गैंगरेप हुआ, इस घटना ने पूरे समाज को अपमानित किया। इसी साथ निर्भया के सभी आरोपियों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई। राष्ट्रपति ने भी कई बार उनकी दया याचिका को खारिज कर दिया था। ये घटना उस वक्त हुई जब निर्भया और उसका बॉव्यफ्रेंड लाइफ ऑफ पाई फिल्म देखकर घर की तरफ जा रहे थे। 16 दिसंबर, 2012 की ठंडी और अंधेरी रात में दक्षिणी दिल्ली थिएटर से बाहर निकलने के बाद दोनों एक बस के लिए इंतजार कर रहे थे।

16 दिसंबर की वो काली रात

23 साल की फिजियोथेरेपिस्ट इंटर्न (बदला हुआ नाम ज्योति) और अवींद्र प्रताप पांडेय दोनों दक्षिण दिल्ली के मुनिरका में बस का इंतजार रह रहे थे। पीड़िता द्वारका में अपने घर पहुंचने के लिए एक ऑटो-रिक्शा की तलाश कर रही थी। उसी दौरान एक ऑफ-ड्यूटी चार्टर बस ने दोनों सवार हो गए। इस घटना को ड्राइवर समेत 6 लोगों ने अंजाम दिया था। कुछ गलत होने पर जब दोस्त ने आपत्ति जताई तो वह चिल्लाया और हाथापाई करने लगे लेकिन नशे में धुत लोगों ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी। उसके दोस्त को रॉड से मारा। इस दौरान मारपीट हुई और दरिदों ने लड़की के साथ गैंगरेप किया।

सामूहिक बालात्कार के दौरान की बर्बरता

एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक घंटे से अधिक समय तक सामूहिक बलात्कार किया गया। जब उसने विरोध किया तो उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी, जिससे उसकी आंतें अलग हो गईं। जिसके बाद सभी आरोपियों ने दोनों को धौला कुंआ रिंग रोड पर फेंक कर चले गए। इसके बाद इस घटना की जानकारी पुलिस को पता चली और पुलिस ने जांच शुरू कर दी। घटना के ग्यारह दिन बाद पीड़िता को ईलाज के लिए सिंगापुर के एक अस्पताल में ट्रांसफर किया गया था। लेकिन दो दिन बाद उसने 29 दिसंबर, 2012 को दम तोड़ दिया। इस घटना का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ और आरोपियों को जल्द फांसी देने की मांग की गई।

घटना के 7 साल बाद मिला था निर्भया को इंसाफ

इस घटना में मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) ने सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोपी थे। पूरे 7 साल तक इस मामले की सुनवाई होती रही। ट्राइल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका तक सभी को खारिज करते हुए 6 में से 4 आरोपियों को फांसी की सजा दी गई। एक नाबालिग को छोड़ दिया गया है। वहीं एक अन्य आरोपी राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। इन सभी आरोपियों को 7 साल 3 महीने और 3 दिन बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में 20 मार्च 2020 को फांसी दी गई। इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक दोषियों के वकील ने फांसी को टालने की पुरजोर कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं नहीं हो सकते थे। जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट से दोषियों को राहत नहीं मिली, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में ये मामला सुना गया। आरोपियों को दी गई फांसी के बाद देश के पीएम मोदी ने दोषियों की सज़ा को न्याय की जीत बताया और निर्भया की मां ने इसे न्याय की जीत बताया था।

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