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इरफान खान की मौत का कारण बना न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, ये हैं लक्षण

फिल्म अभिनेता इरफान खान का न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी से निधन हो गया। एंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से क्या इरफान खान को बचाया जा सकता था या फिर यह एंडोक्राइन ट्यूमर लाइलाज बीमारी है।

इरफान खान की मौत का कारण बना न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, ये हैं लक्षणइरफान खान (फाइल फोटो)

फिल्म अभिनेता इरफान खान का गुरुवार को न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से निधन होने से उनके फैंस में मायूसी छा गई है। उनकों यकीन नहीं हो रहा है कि उनका सबसे अच्छा अभिनेता अब उनके बीच नहीं रहा। एंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से क्या इरफान खान को बचाया जा सकता था या फिर यह एंडोक्राइन ट्यूमर लाइलाज बीमारी है। क्या इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मौत होना क्या निश्चित है।

इस एंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी के बारे में हरिभूमि की टीम ने कैंसर विशेषज्ञों से बात की। कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि एंडोक्राइन ट्यूमर एक तरह की रेयर बीमारी है, जो शरीर के कई अंगों पर गंभीर असर डालती है। न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी से नर्वस सेल्स का निर्माण करने वाले हार्मोन में न्यूरो एंडोक्राइन कोशिकाएं असामान्य गति से बढ़ने लगती हैं।

वैसे तो ये ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है लेकिन सबसे ज्यादा मामलों में पेट में देखा गया है। जैसे पाचन नलिका, आंत, अग्नाशय, फेफड़ों या एपेंडिक्स के भीतर। दूसरे किसी भी कैंसर की तुलना में ये कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए शुरूआत में इसका पता चल पाना मुश्किल ही होता है।

न्यूरो एंडोक्राइन कैंसर के होते है दो प्रकार

पहला है कार्सिनॉइड ट्यूमर जो पाचन नलिका, फेफड़ों और एपेंडिक्स पर असर डालता है। वैसे ये ट्यूमर लिंफ नोड, मस्तिष्क, हड्डियों, स्किन और यहां तक कि ओवरी या फिर टेस्टिकल में भी हो सकते हैं। वहीं दूसरे को पैंक्रिएटिक न्यूएंडोक्राइन ट्यूमर कहते हैं। जैसा कि नाम से साफ है ये पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय में होता है। ये ट्यूमर पेट में हो जाए तो मरीज लंबे समय तक जीवत नहीं रह पाता।

ज्यादा धूप में रहने से होता है ट्यूमर

यह बीमारी क्यों होती है, इसका कोई एक कारण अभी तक नहीं मिल सका है। वजह न मिल पाने के कारण डॉक्टर इस कैंसर के लिए रिस्क एसेसमेंट करते हैं। जैसे किस तरह के लोगों में इस बीमारी की आशंका ज्यादा है। इसका आनुवंशिकी से भी संबंध है। जैसे परिवार के किसी एक पुरुष में बीमारी हो तो आने वाली पीढ़ियों में इसका खतरा बढ़ जाता है। यह भी देखा गया है कि जो लोग धूप में ज्यादा एक्सपोज होते हैं उन्हें इस कैंसर के एक खास टाइप टी का डर होता है। ज्यादा धूप में स्किन के डीएनए नष्ट हो जाते हैं, जिससे कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं और ट्यूमर में बदल सकती हैं।

न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर के लक्षण

इसके लक्षण पेट दर्द, उल्टियां, थकान और तेज बुखार जैसे संकेत शामिल हैं। मरीज का वजन तेजी से कम होता है और उसे बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत पड़ती है।

समय पर पता चल जाए तो इलाज संभव

समय पर पकड़ में आने पर कोलाइटिस या कोलोन इंफेक्शन का इलाज मुश्किल नहीं। आमतौर पर इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी की वजह क्या है। एंटीबायोटिक और लाइस्टाइल में बदलाव से इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। कई बार गंभीर मामलों में आंतों की सर्जरी की जरूरत भी हो सकती है।


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