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नौसेना को सशक्त बनाने के लिए अतिरिक्त बजट की दरकार : नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह

एडमिरल सिंह ने यह भी कहा कि आंकड़ों के हिसाब से सशस्त्र सेनाओं को दिए जाने वाले कुल बजट में से नौसेना के बजट में बीते आठ वर्षों के दौरान करीब 5 की कटौती की गई है। वित्त वर्ष 2012-13 में यह 18 फीसदी था।

नौसेना को सशक्त बनाने के लिए अतिरिक्त बजट की दरकार : नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंहनौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह

भारतीय नौसेना को वर्तमान में चीनी नौसेना की विस्तारवादी नीति से मिल रही चुनौती से निपटने और अपने जंगी बेड़े में जहाजों की संख्या को वर्ष 2027 तक 200 तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त बजटीय धनराशि की आवश्यकता है। फिलहाल नौसेना वार्षिक बजट में की गई कमी की वजह से संकट से जूझ रही है और उसने इसकी पूर्ति करने के लिए रक्षा मंत्रालय से गुहार लगाई है। साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय को भी नौसेना ने आधुनिकीकरण के लिए जरुरी बजटीय धनराशि की कमी को लेकर अवगत करा दिया है।

इन सबके बावजूद नौसेना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यहां मंगलवार को नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि अभी नौसेना के पास कुल 130 जहाज हैं, जिसमें पनडुब्बियां भी शामिल हैं। 48 जहाजों का निर्माण अलग-अलग जगहों पर भारतीय शिपयार्डो में किया जा रहा है।

5 फीसदी की कटौती

एडमिरल सिंह ने यह भी कहा कि आंकड़ों के हिसाब से सशस्त्र सेनाओं को दिए जाने वाले कुल बजट में से नौसेना के बजट में बीते आठ वर्षों के दौरान करीब 5 की कटौती की गई है। वित्त वर्ष 2012-13 में यह 18 फीसदी था। लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में यह घटकर 13 फीसदी रह गया है। हमने इसके बारे में रक्षा मंत्रालय के समक्ष भी अपनी मांग को रखा है। जिसमें हमें उम्मीद है कि नौसेना को कुछ अतिरिक्त धनराशि मिल जाएगी। जिससे हम अपनी जरुरी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर सकेंगे।

सरकार की तरफ से नौसेना के बजट में की गई कटौती का ताजा मामला बीते सप्ताह हुई रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) में भी देखने को मिला। जब डीएसी ने नौसेना के 10 पी8आई विमानों की खरीद प्रस्ताव को दरकिनार कर केवल 6 पी8आई की खरीद को मंजूरी प्रदान की। फंड की कमी की वजह से नौसेनाप्रमुख ने अपने अधिकारियों को कहा है कि वह जहाजों की संख्या पर नहीं बल्कि प्रति जहाज का आकलन उसकी मारक क्षमता के हिसाब से करें।

इजाजत बिना प्रवेश वर्जित

उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह स्थित भारत के विशिष्ट आर्थिक जोन (ईईजेड) में जबरन घुसपैठ की कोशिश कर रहे चीनी जहाज शी यान-1 को खदेड़ने के मामले पर कहा कि समुद्री सीमा को लेकर हमारा नियम बिलकुल साफ है कि अगर आप हमारे ईईजेड में काम करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको हमारी अनुमति लेनी पड़ेगी। चीनी नौसेना के एक समय में 7 से 8 जहाज हिंद महासागर के इलाके में मौजूद रहते हैं। नौसेना की दीर्धावधि योजना के हिसाब से हमें हिंद महासागर क्षेत्र में 3 विमानवाहक युद्धपोतों की जरुरत है। इसमें से दो की नियमित तैनाती होनी चाहिए।

जिससे वह चौबीसों घंटे बारी-बारी से समुद्री निगरानी कर सकें। पहला स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत 2022 तक ऑपरेशनल हो जाएगा, मिग-29के इससे उड़ान भरेंगे। दूसरे विमानवाहक युद्धपोत के लिए नौसेना जल्द ही सरकार के सामने अपनी आवश्यकता जाहिर करेगी। योजना के हिसाब से इसका वजन 65 हजार टन होगा और यह कैटोबार, इलेक्ट्रिक प्रॉपलशन तकनीक से समुद्र में संचालन करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति को देखें तो नौसेना अपनी जैसी समान सोच रखने वाले देशों के साथ समन्वय कर रही है। जिनके उक्त क्षेत्र में समान हित हैं। चीन को मिलन अभ्यास में शामिल न करने को लेकर भी नौसेनाप्रमुख ने कहा कि इसमें हमने समान सोच वाले देशों को आमंत्रित किया है।

सशक्त हो सीडीएस

देश में किए जा रहे पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद के गठन को लेकर नौसेनाप्रमुख ने कहा, सेनाओं की रणनीतिक योजनाओं को लागू करने के लिए सीडीएस को पूरी तरह से सशक्त होना चाहिए। यह प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक ऐतिहासिक निर्णय है।

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