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सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में झारखंड का झरिया शहर खतरनाक, इन राज्यों की सिटी भी हैं टॉप लिस्ट में

पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस इंडिया ने देश भर के 287 शहरों से पीएम 10 डेटा के विश्लेषण के आधार एक रिपोर्ट जारी की है।

ग्रीनपीस इंडिया ने सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची की जारी, सबसे प्रदूषित शहरों में झारखंड का झरियासबसे प्रदूषित शहरों में झारखंड का झरिया (फाइल फोटो)

पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस इंडिया ने सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची जारी की है। चौथी एयरपोकैलिप्स रिपोर्ट में देश भर के 287 शहरों से पीएम 10 डेटा के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। आइए आपको सबसे ज्यादा और कम प्रदूषण वाले राज्यों के बारे में बताते हैं। जारी रिपोर्ट के अनुसार 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के हैं। नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, प्रयागराज, मुरादाबाद और फिरोजाबाद की आबोहवा बेहद खराब बताई गई है।

इन शहरों में उच्च स्तर का वायु प्रदूषण

287 भारतीय शहरों में से 231 में वायु प्रदूषण उच्च स्तर पर है। इन शहरों में पीएम-10 की मात्रा तय राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कहीं ज्यादा दर्ज की गई है। रिपोर्ट में यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में कई ऐसे शहर हैं, जहां पीएम-10 का स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक है। बावजूद इसके उन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनएसीपी) का हिस्सा नहीं बनाया गया है।

झरिया की हवा जहरीली

कोयला खदानों के लिए मशहूर झारखंड के झरिया और धनबाद की हवा सबसे जहरीली बताई गई है। साल 2018 में दोनों शहरों में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 322 और 264 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया था।

दिल्ली की हवा कम जहरीली

2017 में सबसे दूषित भारतीय शहरों की सूची में आठवें पायदान पर काबिज दिल्ली 2018 में दसवें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि, यहां पीएम-10 की मात्रा अब भी तय राष्ट्रीय मानक से साढ़े तीन गुना, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानकों से 11 गुना ज्यादा है।

मिजोरम के लुंगलेई की हवा साफ

मिजोरम के लुंगलेई और मेघालय के डॉकी की हवा सबसे साफ है। 2018 में दोनों शहरों में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 11 व 23 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। 2017 में यह क्रमश 25 और 28 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

ग्रीनपीस इंडिया के मुताबिक प्रदूषण निगरानी कार्यक्रम में शामिल 80 फीसदी से ज्यादा भारतीय शहरों में पीएम-10 की मात्रा तय मानकों से अधिक है। इन शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में शामिल किए बगैर वायु प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं होगा।

आइए जानेें 2017-2018 में शहर पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर

- झरिया (झारखंड) में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018 में 2 और पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2017 में 295 रहा।

- धनबाद (झारखंड) पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018 में 264 और 2017 में 238 रहा।

- नोएडा में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018 में 264 और 2017 में 216 रहा।

- गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018 में 245 और 2017 में 281 रहा।

- अहमदाबाद (गुजरात) के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018 में 236 और 2017 में
120 रहा।

- बरेली (उत्तर प्रदेश) के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 2018, 233 और 2017 में यह 195 पर रहा।

- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 231 और 2017 में यह 140 पर रहा।

- मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 227 और 2017 में यह 217 पर रहा।

-फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 226 और 2017 में यह 220 पर रहा।

- दिल्ली के पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 225 और 2017 में यह 240 पर रहा।
















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