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Motilal Vora Biography In Hindi: मोतीलाल वोरा का राजनीतिक सफर, जानिये पत्रकारिता से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने की कहानी

Motilal Vora Biography In Hindi: मोतीलाल वोरा किशोरीलाल शुक्ल से प्रभावित हो कांग्रेस में आए थे। समाजवादी पार्टी से जुड़े वोरा ने किशोरीलाल शुक्ल से मुलाकात के बाद कांग्रेस की सदस्यता ली। जिसके बाद वोरा ने वर्ष 1968 में दुर्ग नगर निगम में पार्षद निर्वाचित होकर राजनीतिक सफर शुरू किया था।

Motilal Vora Death: मोतीलाल वोरा का राजनीतिक सफर, जानिये पत्रकारिता से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने की कहानी
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मोतीलाल वोरा का राजनीतिक सफर

Motilal Vora Biography In Hindi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का 93 वर्ष की आयु में दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया। मोतीलाल वोरा शुरू से ही राजनीति में सक्रिय रहे थे। वोरा का राजस्थान में जन्म हुआ लेकिन मध्यप्रदेश में रायपुर से पढ़ाई-लिखाई की। जिसके बाद वह राजनीति के शीर्ष तक पहुंचे। वोरा पत्रकारिता करते हुए पार्षद के तौर पर निर्वाचित हुये थे। जिसके बाद वह विधायक बने। बाद में मंत्री और फिर मुख्यमंत्री बने। जिसके कुछ सालों बाद राज्यसभा सदस्य बनते ही वे केंद्रीय मंत्री बनाये गए थे। कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद और बेहतर सलाहकार के रूप में वोरा राजनीतिक नेता के रूप में माने जाते है। आइये एक नजर उनके राजनीतिक सफर पर डाले:-

मोतीलाल वोरा किशोरीलाल शुक्ल से प्रभावित हो कांग्रेस में आए थे। समाजवादी पार्टी से जुड़े वोरा ने किशोरीलाल शुक्ल से मुलाकात के बाद कांग्रेस की सदस्यता ली। जिसके बाद वोरा ने वर्ष 1968 में दुर्ग नगर निगम में पार्षद निर्वाचित होकर राजनीतिक सफर शुरू किया था। वर्ष 1972 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य (विधायक) बने। इसके बाद वर्ष 1977 और फिर 1980 में भी लगातार चुनाव जीतकर विधायक पद की शपथ ली थी। मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने मोतीलाल वोरा को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया।

वोरा 13 मार्च 1985 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 13 फरवरी 1988 को इस पद से इस्तीफा दिया। राज्यसभा की सदस्यता के साथ वोरा को केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। उनको स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। 16 मई 1993 को उत्तरप्रदेश के राज्यपाल बनाए गए, लेकिन वोरा 1998 में लोकसभा चुनाव जीत संसद पहुंचे। गांधी परिवार से नजदीकी और पार्टी का उनपर भरोसा कभी कम नहीं हुआ। वोरा कई पदों पर रहे। अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में कोषाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर रहे। कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ वोरा का नाम भी नेशनल हेराल्ड केस में शामिल रहा।

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