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मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- कोरोना से मरने वालों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देना संभव नहीं

जानकारी के लिए आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कोरोना वायरस की वजह से मरने वाले लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने की अपील की गई है।

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- कोरोना से मरने वालों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देना संभव नहीं
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केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोरोना वायरस से मरने वालों के परिजनों को चार लाख का मुआवजा देना संभव नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुआवजा दिए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ने कोर्ट से कहा है कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि इससे आपदा राहत कोष खाली हो जाएगा। सरकार ने कहा है कि सभी कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देना राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कोरोना वायरस की वजह से मरने वाले लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने की अपील की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मोदी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब मोदी सरकार ने कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि आपदा प्रबंधन कानून में मुआवजे का प्रावधान केवल भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं पर ही लागू है। इसे कोरोना वायरस महामारी पर लागू नहीं किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि यदि पूरे एसडीआरएफ फंड को कोविड-19 पीड़ितों को मुआवजा देने में ही खर्च कर दिया गया तो राज्य सरकारों के पास कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए की जा रहीं तैयारियों और अलग-अलग मेडिकल सप्लाई के साथ-साथ चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी अन्य आपदाओं की देखभाल के लिए पर्याप्त पैसा की कमी हो जाएगी। यही वजह है कि कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वाले लोगों को अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए याचिकाकर्ता की प्रार्थना, राज्य सरकारों की वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है।

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