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रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान, ओएफबी को पीएसयू बनाने की तैयारी में सरकार!

आयुध फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के निजीकरण को लेकर उनके कर्मचारियों में बढ़ रहे रोष को बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान के जरिए शांत करने की कोशिश की है। जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय द्वारा आयुध फैक्ट्रियों का निजीकरण नहीं बल्कि कॉरपोटाइजेशन किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान, ओएफबी को पीएसयू बनाने की तैयारी में सरकार!

आयुध फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के निजीकरण को लेकर उनके कर्मचारियों में बढ़ रहे रोष को बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान के जरिए शांत करने की कोशिश की है। जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय द्वारा आयुध फैक्ट्रियों का निजीकरण नहीं बल्कि कॉरपोटाइजेशन किया जाएगा।

इससे उनकी कार्यक्षमता में कई गुना का इजाफा होगा, बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होगी, उत्पादों की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगा और कामकाज में पारदर्शिता स्थापित होगी। मौजूदा दौर में मंत्रालय इन तमाम विषयों को लेकर ओएफबी पर पैनी नजर बनाए हुए है। लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

हालांकि विभाग विगत कुछ वर्षों के दौरान ओएफबी की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए गठित की गई कुछ कमेटियों की सिफारिशों का अध्ययन करने में जरुर लगा हुआ है। इसमें वर्ष 2000 में गठित की गई टी़ के नायर कमेटी, 2004 में बनाई गई डॉ़ विजय केलकर कमेटी और वर्ष 2015 में गठित रमन पुरी कमेटी मुख्य है।

गौरतलब है कि मंत्रालय द्वारा ओएफबी के निजीकरण किए जाने के संकेतों के बीच 21 अगस्त को देश के अलग-अलग भागों में मौजूद आयुध फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने एकमत से एक महीने तक हड़ताल करने का निर्णय लिया है। ओएफबी के तहत 41 आयुध फैक्ट्रियां, 9 ट्रेनिंग इंस्ट्टीट्यूट, 3 रीजनल मार्केंटिंग सेंटर और 4 रीजनल कंट्रोलर ऑफ सेफ्टी आते हैं।

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