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Mayawati Birthday : राजनीति में आने के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने छोड़ा था पिता का घर

Mayawati Birthday : बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती आज अपना 64वां जन्मदिन मना रही है। 21 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखने वाली निडर माया ने अनेक चुनौतियों का सामना किया है।

राजनीति में आने के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने छोड़ा था पिता का घरबहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती

Mayawati Birthday : बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती आज 64 वर्ष की हो गई हैं। आज पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा कार्यकताओं ने पार्टी प्रमुख का 64वां जन्मदिन धूमधाम के साथ मनाया। बीएसपी कार्यकर्ताओं ने 64 किलोग्राम का केक काटकर जश्न मनाया। मायावती ने 21 वर्ष की आयु में राजनीति में कदम रखा। मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल, नई दिल्ली में एक हिंदू दलित परिवार में हुआ था। उनके पिता, प्रभु दास, बादलपुर, गौतम बुद्ध नगर में एक डाकघर में कर्मचारी थे। मायावती ने राजनीति में कदम रखने के लिए काफी कुछ खोया है। माया को इसके लिए अपना घर तक छोड़ना पडा। आइए जानें बसपा सुप्रीमो मायावती के जीवन के जुड़े कुछ खास किस्से जो शायद आप न जानते हो।

मायावती का वो पहला भाषण

1977 में दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में जातिवादी व्यवस्था की बुराइयों पर एक कार्यक्रम रखा गया था। उस कार्यक्रम में सुश्री मायावती ने भाषण दिया।माया के उस भाषण से कांशीराम बेहद प्रभवित हुए।


उस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जनता दल के नेता राज नारायण थे। अपने एक भाषण में राज नारायण बार-बार दलितों को हरिजन कह कर संबोधित कर रहे थे। इस पर मायावती आग बबूला हो गई। जब मायावती की बारी आई तो उन्होंने राज नारायण पर आरोप लगाया कि उन्होंने पूरी दलित जाति का अपमान किया है। माया के उस जोरदार भाषण ने सभी का मन जीत लिया। पूरी सभा में राज नारायण मुर्दाबाद के नारे गूंजने लगे।

कांशीराम बने मायावती के गुरु


माया के उस भाषण से कांशीराम इतने प्रभावित हुए कि वह मायावती के घर पहुंच गए। उन्होंने मायावती से कहा कि यदि वह जातीय उत्पीड़न से लड़ना चाहती हैं तो राजनीतिक सत्ता में उनका स्वागत है। कांशीराम ''मिशन'' शब्द को अक्सर इस्तेमाल करते थे। उसी दिन से मायावती ने राजनीति से नाता जोड़ लिया।

पिता ने माया को दी थी धमकी

अपनी बेटी मायावती को राजनीति में जाता देख पिता क्रोधित हो उठे। पिता को मायावती की कांशीराम के साथ बढ़ती नजदीकियों से परेशानी थी।


मायावती के पिता ने मायावती को साफ तौर पर यह कह दिया कि वह घर और राजनीति में से एक को चुन लें। माया ने पिता के कठोर वचन सुनकर घर छोडने का फैसला किया। निडर मायावती ने टीचर की नौकरी से बचाए पैसों के दम पर घर छोड़ दिया। वह फिर दिल्ली के करोलबाग में कांशीराम के एक कमरे वाले घर में रहने लगीं।

माया ने किया असंख्य चुनौतियों का सामाना


जब कांशीराम अपने स्वागत कक्ष में लोगों के साथ बैठकें कर रहे होते तो मायावती आंगन में दरी बिछा कर ग्रामीण इलाकों से आए दलित पुरुषों को पार्टी में शामिल कर रही होती थी। जमीन पर बैठ कर मायावती रोजाना कम से कम पांच जिला संयोजकों से मिलतीं थी। ऐसे ही काम करते-करते मायवती ने धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश के हर जिले में उन्होंने अपनी पहुंच बना ली।

1989 में जीता पहला चुनाव

1984 में मायावती ने मुजफ्फरनगर जिले की कैराना लोक सभा सीट से चुनाव लड़ा। 1985 में उन्होंने बिजनौर उपचुनाव लड़ा और 1987 में हरिद्वार उपचुनाव लड़ा। इनमें से किसी भी चुनाव में मायावती को जीत नहीं मिली लेकिन मत संख्या में निरंतर बढ़ोतरी होती गई। कैराना में उन्हें 44 हजार वोट और हरिद्वार में 125000 वोट प्राप्त हुए।


1989 में बिजनौर से वह पहली बार चुनाव जीतने में कामयाब हुईं जबकि कांशीराम ने 1996 में पंजाब के होशियारपुर से पहली बार चुनाव जीता।

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