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Mann Ki Baat: पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें, ये तीन प्रमुख रहे मुद्दे

लोकसभा चुनाव में जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के दौरान मन की बात कार्यक्रम का पहला संस्करण 30 जून रविवार को हुआ। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने अपने कार्यक्रम में स्वच्छता, जल संरक्षण और योग आदि मुद्दों पर खुलकर बात की और जल संकट को लेकर जनता से अनुरोध भी किया।

Mann Ki Baat: पीएम मोदी ने श्री कृष्ण और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को किया याद, ये हैं भाषण से जुड़ी खास बातेंPM Modi Mann Ki Baat 25 August 2019 live update

लोकसभा चुनाव में जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के दौरान मन की बात कार्यक्रम का पहला संस्करण 30 जून रविवार को हुआ। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने अपने कार्यक्रम में स्वच्छता, जल संरक्षण और योग आदि मुद्दों पर खुलकर बात की और जल संकट को लेकर जनता से अनुरोध भी किया।

ये हैं पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम से जुड़ी 10 खास बातें...

1. पीएम ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है। 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियाँ, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया। योग के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रधानमंत्री कार्यलय अवार्ड की घोषणा, अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी। यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है। शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहाँ इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो, इतना बड़ा, योग ने रूप ले लिया है।

2. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता। जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का, और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप जन शक्ति 4 जल शक्ति के साथ शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके।

3. मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हू। देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है। हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूँ।

4. पीएम ने पहला अनुरोध है – जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें। जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे।

5. पीएम मोदी ने कहा कि जो भी पोरबंदर के कीर्ति मंदिर जायें वो उस पानी के टांके को जरुर देखें। 200 साल पुराने उस टांके में आज भी पानी है और बरसात के पानी को रोकने की व्यवस्था है, ऐसे कई प्रकार के प्रयोग हर जगह पर होंगे।

6. मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे इस बात की ख़ुशी है कि हमारे देश के लोग उन मुद्दों के बारे में सोच रहे हैं, जो न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी बड़ी चुनौती है। मैं चुनाव आयोग को, और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को, बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और भारत के जागरूक मतदाताओं को नमन करता हूँ।

7. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्र भी भारत में ही है। यह मतदान केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्फिति क्षेत्र में 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

8. अरुणाचल प्रदेश के एक रिमोट इलाके में, महज एक महिला मतदाता के लिए पोलिंग स्टेशन बनाया गया। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को वहाँ पहुँचने के लिए दो-दो दिन तक यात्रा करनी पड़ी - यही तो लोकतंत्र का सच्चा सम्मान है। आप कल्पना कर सकते हैं कि इस प्रकार के चुनाव संपन्न कराने में कितने बड़े स्तर पर संसाधनों की और मानवशक्ति की आवश्यकता हुई होगी। लाखों कर्मियों की दिन-रात की मेहनत से चुनाव संपन्न हो सका। सैन्य कर्मियों ने भी परिश्रम की पराकाष्ठा की।

9. जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, जेल के सलाखों तक, आन्दोलन सिमट नहीं गया था। जन-जन के दिल में एक आक्रोश था।

10. एक लंबे अंतराल के बाद आपके बी मन की बात, जन-जन की बात, जन-मन की बात इसका हम सिलसिला जारी कर रहे हैं। चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था। हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे।

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