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Mahatma Gandhi Jayanti 2020: पहली बार इस मामले में महात्मा गांधी हुए थे फेल, जानें क्या थी उनके जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता

Mahatma Gandhi Jayanti 2020: महात्मा गांधी के आंदोलनों की सफलता तो हम सभी को मालूम है। लेकिन महात्मा गांधी से जुड़ी एक ऐसी भी कहानी है जिसे उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता माना जा सकता है।

Mahatma Gandhi Jayanti 2020: ये थी महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता
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Mahatma Gandhi Jayanti 2020: ये थी महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता

Mahatma Gandhi Jayanti 2020: महात्मा गांधी ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके आंदोलनों ने ही अंग्रेजों को ये एहसास दिला दिया था कि भारत उनके लिए रहने की जगह नहीं बची। महात्मा गांधी के द्वारा चलाए गए सभी आंदोलनों को अपार सफलता मिली थी। ऐसा भी कहा जा सकता है कि महात्मा गांधी ने कभी विफलता हासिल नहीं की। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी कहानी के बारे में, जिसे महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी विफलता माना जाता है।

23 सितंबर 1944

बात उस समय की है जब महात्मा गांधी अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। इस दौरान महात्मा गांधी ने मुहम्मद अली जिन्ना को दो पत्र लिखे। पहले पत्र में उन्होंने लिखा था कि कल शाम की हमारी बातचीत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं रही। हम कभी एक पन्ने पर नहीं मिलते। हमारी सोच और हमारा विचार एक दूसरे के समानांतर में चलते दिखाई देते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि हम एक-दूसरे से बिछड़ना नहीं चाहते, इसलिए हमने दोबारा बातचीत करने की कवायद शुरू की। मैं चाहता हूं कि आप मुझे बताएं कि आप किन बातों पर मेरा हस्ताक्षर लेना चाहते हैं। इसकी जानकारी आप मुझे पत्र के माध्यम से दें।

जिन्ना ने इस पत्र का जवाब बड़ी बेरुखी से दिया। जिन्ना ने लिखा कि आपके पास ऐसी हैसियत नहीं है कि आप किसी का प्रतिनिधित्व करें। हस्ताक्षर की बात तो तब आएगी जब आपके पास प्रतिनिधि बनने की हैसियत होगी। उन्होंने लिखा कि मेरा फैसला नहीं बदल सकता। हम मार्च 1940 वाले लाहौर-प्रस्ताव के सिद्धांतों पर कायम रहेंगे। बता दें कि यह प्रस्ताव द्विराष्ट्र सिद्धांत और भारत के विभाजन को लेकर किया गया था।

इसके बाद दूसरे पत्र में महात्मा गांधी ने लिखा कि आज ईद के दिन आपको क्या भेट करुं। ऐसे में मैंने सोचा कि अपने खाखरे में से आधा हिस्सा आपके लिए और आपकी बहन फातिमा जिन्ना के लिए भेजूं, जो मेरे जैसे इंसान को शोभा देगा। मुझे उम्मीद है कि आप इसे मेरा प्रेम समझकर अवश्य खाएंगे। बता दें कि इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है कि जिन्ना ने वो खाखरा खाया या नहीं। लेकिन ऐसा माना जाता है कि जिन्ना ने इस पत्र का भी जवाब सही ढंग से नहीं दिया था।

क्या थी राजनीतिक विफलता

महात्मा गांधी हमेंशा से चाहते थे कि हिंदू-मुसलमान के बीच कोई फूट न डाल सके। हालांकि महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी विफलता थी कि वो जिन्ना को भारत विभाजन के मुद्दे पर राजी नहीं कर पाए। उन्होंने कई प्रयास किए लेकिन जिन्ना का दिल नहीं पिघला पाए। कहा जाता है कि जिन्ना का ही मुद्दा ऐसा था, जिस मामले में पहली बार महात्मा गांधी को कमजोर पड़ते देखा गया था।

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