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सचिन वाजे पर शिवसेना और एनसीपी में खटपट, अनिल देशमुख को लेकर नवाब मलिक ने संजय राउत को दिया ये करारा जवाब

राउत ने कहा कि गृहमंत्री ने वाझे को 100 करोड़ रुपए वसूलने का टार्गेट दिया था, ऐसा आरोप मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह लगा रहे हैं। उन आरोपों का सामना करने के लिए प्रारंभ में कोई भी आगे नहीं आया! सरकार के पास डैमेज कंट्रोल की कोई योजना नहीं है, ये एक बार फिर नजर आया।

सचिन वाजे को लेकर शिवसेना और एनसीपी में खटपट,
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सचिन वाजे को लेकर शिवसेना और एनसीपी में खटपट

महाराष्ट्र में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे (Sachin Waje) को लेकर राजनीतिक और गर्म होता जा रहा है। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र (Maharashtra) में लगातार विपक्ष हमला कर रहा है वहीं आज शिवसेना (ShivSena) ने सामना में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) पर सवाल उठाना हैं। शिवसेना के सासंद संजय राउत (Sanjay Raut) ने सामना में लिखा है कि सचिन वाजे वसूली रहा था और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को इसकी जानकारी नहीं थी? देशमुख को गृहमंत्री का पद दुर्घटनावश मिल गया। इस बारे में जब एनसीपी के नवाब मलिक से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि देशमुख वे 'एक्सीडेंटल' गृह मंत्री नहीं हैं। मलिक ने कहा कि सामना के लेख में कहा गया है कि अनिल देशमुख 'एक्सीडेंटल' गृह मंत्री हैं। संपादक को लेख लिखने का अधिकार है। शरद पवार ने उन्हें सोच समझकर ज़िम्मेदारी दी है। वे 'एक्सीडेंटल' गृह मंत्री नहीं हैं। अगर गृह मंत्री में कुछ कमियां हैं तो वे उसे दूर करने का काम करेंगे।

आखिर एपीआई स्तर के अधिकारी सचिन वाजे को इतने अधिकार किसने दिए? यही जांच का विषय है। पुलिस आयुक्त, गृह मंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा व विश्वासपात्र रहा सचिन वाजे महज एक सहायक पुलिस निरीक्षक था लेकिन उसे सरकार में असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री ने वाझे को 100 करोड़ रुपए वसूलने का टार्गेट दिया था, ऐसा आरोप मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह लगा रहे हैं।

उन आरोपों का सामना करने के लिए प्रारंभ में कोई भी आगे नहीं आया! सरकार के पास डैमेज कंट्रोल की कोई योजना नहीं है, ये एक बार फिर नजर आया। लेख में आगे लिखा गया कि महाराष्ट्र के विपक्ष को ठाकरे सरकार को गिराने की जल्दबाजी लगी है इसलिए फटे हुए गुब्बारे में हवा भरने का काम वे कर रहे हैं। उनके आरोप प्रारंभ में जोरदार लगते हैं बाद में वे झूठ सिद्ध होते हैं। परंतु ऐसे आरोपों के कारण सरकार गिरने लगी तो केंद्र की मोदी सरकार को सबसे पहले जाना होगा।

शिवसेना ने कहा कि सचिन वाजे अब एक रहस्यमयी मामला बन गया है। पुलिस आयुक्त, गृहमंत्री, मंत्रिमंडल के प्रमुख लोगों का दुलारा और विश्वासपात्र रहा वाजे महज एक सहायक पुलिस निरीक्षक था। उसे मुंबई पुलिस का असीमित अधिकार किसके आदेश पर दिया गया, यह वास्तविक जांच का विषय है। मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर वाजे वसूली कर रहा था और गृहमंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं होगी?

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