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जानें मध्य प्रदेश में होली पर कैसा रहा सियासी घटनाक्रम, यहां पढ़ें पूरा अपडेट

होली पर मध्य प्रदेश में सियासी ड्रामा शुरू हुआ। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया।

जानें मध्य प्रदेश में होली पर कैसा रहा सियासी घटनाक्रम, यहां पढ़ें पूरा अपडेटज्योतिरादित्य सिंधिया और सीएम कमलनाथ

राज्यसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव से पहले होली पर मध्य प्रदेश में सियासी ड्रामा शुरू हुआ। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के इशारे पर ये सब हो रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया माधवराव सिंधिया के बेटे है। वो 11-12 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में एमपी में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने की तैयारियां हो रही हैं।

होली के दिन मध्य प्रदेश में राजनीतिक रंग केसरिया में बदल गए। क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पार्टी छोड़ दी। कांग्रेस के विधायकों का पलायन हुआ। जिसमें 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया।

इससे राज्य में 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार टूटने की कगार पर है। इसके बावजूद सीएम कमलनाथ ने कहा कि उनके पास पूरा बहुमत है। 43 साल पहले उनकी दादी विजया राजे सिंधिया ने भी कांग्रेस की सरकार गिराई थी।

होली पर ऐसे शुरु हुआ ड्रामा

मंगलवार की सुबह जब देश में होली मनाई जा रही थी, तभी सिंधिया ने दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह से मिले। उसके बाद वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके 7 लोक कल्याण मार्ग आवास पर मुलाकात की। जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी।

सिंधिया ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा कि जबकि मेरा उद्देश्य हमेशा वही रहा है जो हमेशा से ही रहा है, अपने राज्य और अपने देश के लोगों की सेवा करना, मुझे विश्वास है कि मैं इस पार्टी के भीतर ऐसा करने में असमर्थ हूं। मैं अपने लोगों और श्रमिकों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने और महसूस करने के लिए मानता हूं कि यह सबसे अच्छा है कि मैं अब एक नई शुरुआत करूं।

इसके बाद कोई आधारिकारिक बयान भाजपा की तरफ से नहीं आया। लेकिन उसके बाद बीजेपी सूत्रों ने कहा कि सिंधिया के साथ लंबे विचार-विमर्श करने के पार्टी के शीर्ष दो नेताओं के फैसले ने उनके साथ जुड़े महत्व को रेखांकित किया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 9 मार्च को दिए गए त्याग पत्र में सिंधिया ने कहा अब मेरे लिए आगे बढ़ने का समय है। क्योंकि वह पार्टी में रहते हुए देश के लोगों की सेवा करने में असमर्थ हैं। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि उनका पत्र सोनिया गांधी के निवास पर मंगलवार दोपहर 12.20 बजे मिला। सिंधिया ने पार्टी छोड़ने के साथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के पतन के लिए नेतृत्व किया।

उनके इस्तीफा देते ही सिंधिया के खेमे के 22 कांग्रेसी विधायकों ने शाम होते होते पार्टी छोड़ दी। उनमें से 19 ने अपने इस्तीफे राज्यपाल लाल जी टंडन को भेज दिया। जबकि तीन ने इसे सीधे अध्यक्ष के पास भेजा। छह विधायक मंत्री हैं। उनके इस्तीफे के बाद कमलनाथ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर उन्हें तत्काल हटाने की मांग की।

कांग्रेस को चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक का समर्थन मिला हुआ है। उनके समर्थन से भी कांग्रेस बहुमत से गिर जाएगी और यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या वे कांग्रेस का समर्थन जारी रखेंगे या भाजपा के साथ जाएंगे। यदि 22 विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया तो विधानसभा की ताकत 206 हो जाएगी। बहुमत बनाए रखने के लिए कम से कम 104 विधायको होने जरूरी है। हालांकि, कांग्रेस 92 सीटों के साथ बचेगी, जबकि भाजपा के पास 107 सीटें हैं।

मध्य प्रदेश में ताजा घटनाक्रम

ताजा घटनाक्रम की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने अपने विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए उन्हें कैद कर दिया है। भाजपा ने अपने विधायकों की खरीद फिरोत के डर से भोपाल एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। वहीं कांग्रेस के विधायकों को भोपाल से जयपुर भेजा जा रहा है। इसके अलावा आज सिंधिया दिल्ली में भाजपा पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद ही तय होगा कि मध्य प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी और राज्यसभा के लिए किस किस के नाम पर एमपी सीट से नामों का ऐलान होगा।

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