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मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के कांग्रेस ने शुरू किए प्रयास, प्रशांत किशोर को सौंपी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए योजना शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया का रथ रोकने के लिए प्रशांत किशोर को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे को हराने की रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के कांग्रेस ने शुरू किए प्रयास, प्रशांत किशोर को सौंपी रणनीति बनाने की जिम्मेदारीप्रशांत किशोर

मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए योजना शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया का रथ रोकने के लिए प्रशांत किशोर को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे को हराने की रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।

भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज की जोड़ी के साथ चुनाव प्रचार में उतरने की तैयारी कर चुकी है। वहीं कांग्रेस प्रशांत किशोर (पीके) के नेतृत्व में उपचुनाव की रणनीति तैयार करेगी। प्रशांत किशोर को कांग्रेस ने मप्र में उपचुनाव के लिए प्रभारी भी बना दिया है।

प्रदेश की जिन 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 16 विधानसभा सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल में हैं। सिंधिया और शिवराज की जोड़ी के साथ भाजपा मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी है, वहीं कांग्रेस ने इस जोड़ी को कमजोर करने के लिए अब प्रशांत किशोर को उपचुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रशांत किशोर को उपचुनाव का प्रभारी बनाया है।

इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में भी प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के लिए 15 साल के बाद सत्ता में वापसी की रणनीति बनाई थी और उस रणनीति पर कांग्रेस ने कई सीटों पर चुनाव लड़कर सफलता प्राप्त की थी। अब एक बार फिर कांग्रेस पीके के सहारे सिंधिया को घर में घेरने की रणनीति तैयार करने पर जोर दे रही है। इस रणनीति के चलते उसने यह फैसला भी लिया है कि वह चुनाव का वार रूम भी भोपाल के बजाय ग्वालियर-चंबल अंचल के ग्वालियर में ही बनेगा।

बसपा के मैदान में आने से त्रिकोणीय होगा मुकाबला

बहुजन समाज पार्टी ने भी उपचुनाव में सभी 24 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला लिया है। बसपा की इस घोषणा के साथ ही यह तय हो गया है कि उपचुनाव में सभी सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। ग्वालियर-चंबल में ज्यादा सीटें हैं और इस अंचल में बसपा का खासा प्रभाव भी है। बसपा की प्रदेश इकाई इन सीटों के संभावित प्रत्याशियों के नाम पार्टी प्रमुख मायावती को भेजेगी, जिसके बाद वहां से नाम तय होंगे।

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