Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

Lal Bahadur Shastri : स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए लाल बहादुर शास्त्री ने छोड़ दी थी पढ़ाई, जानें जिंदगी से जुड़े 5 किस्से

Lal Bahadur Shastri : जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी शनिवार को 116वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी।

Lal Bahadur Shastri Facts: स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए लाल बहादुर शास्त्री छोड़ दी थी पढ़ाई, जानें जिंदगी से जुड़े 5 किस्सेलाल बहादुर शास्त्री

Lal Bahadur Shastri : लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) भारत के सबसे तेजतर्रार नेताओं में से एक थे। वह भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री (Prime Minister) थे, जिन्होंने देश में एकता के विचार पर हमेशा जोर दिया। लाल बहादुर शास्त्री ने बाहरी मामलों में भारत के भविष्य को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वहीं से उन्होंने एक नारा दिया जो उनके साथ आज भी जुड़ा हुआ है। जय जवान जय किसान।

11 जनवरी शनिवार को उनकी 116वीं पुण्यतिथि (Death Anniversary) मनाई जाएगी। उनका जन्म 2 अक्टूबर को हुआ था और 11 जनवरी को ताशकंद समझौते के बाद उनके और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। जिस दौरान उनकी मौत हो गई।


ये हैं लाल बहादुर शास्त्री की जिंदगी से जुड़े 5 किस्से....

1. वह समानता का विश्वास करने वाले थे और जाति व्यवस्था को एक सामाजिक बुराई मानते था, जो विभाजन पैदा करती है। इसलिए, कम उम्र में लाल बहादुर शास्त्री ने अपने परिवार का नाम छोड़ दिया। यह काशी विद्यापीठ में शामिल होने के बाद और दर्शनशास्त्र में डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली थी।

2. जाति व्यवस्था केवल सामाजिक बुराई नहीं थी जिसके खिलाफ हमेशा लाल बहादुर शास्त्री लड़े। उन्होंने दहेज प्रथा के खिलाफ भी आवाज उठाई और अपनी शादी में अपनी पत्नी के परिवार से कुछ भी लेने से इनकार कर दिया। अपने ससुर के बार-बार अनुरोध के बाद ही उन्होंने शादी के उपहार के रूप में खादी कपड़ा लिया था।

3. इतिहासकार बताते हैं कि मोहनदास गांधी और बाल गंगाधर तिलक से प्रेरणा लेते हुए लाल बहादुर शास्त्री ने 1921 में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।


4. स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा होने के कारण उन्हें काफी बार जेल में जाना पड़ा। यही वजह है कि जब उनकी बेटी बीमार पड़ी, तो उन्हें 15 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया। जब वह बीमारी की चपेट में आई तो वह उसके साथ थे। लेकिन वह अपनी बेटी के अंतिम संस्कार करने के बाद जल्द ही वापस जेल चले गए।

5. भारत की स्वतंत्रता के बाद गोविंद बल्लभ पंत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला और उन्होंने शास्त्री को पुलिस और परिवहन मंत्री के पद पर तैनात किया। शास्त्री जी ने पहली बार महिलाओं को कंडक्टर के रूप में नियुक्त किया। जो देश में पहली बार था। 1947 के सांप्रदायिक दंगों को नियंत्रण करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

Next Story
Top