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Knowledge News: जम्मू कश्मीर में 'पेंसिल विलेज' के नाम से मशहूर गांव के बारे में जानें खास बातें, पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं जिक्र

भारत में जम्मू-कश्मीर (Kasmir) के पुलवामा में एक ऐसा गांव है जो कि 'पेंसिल विलेज' के नाम से मशहूर है। जानकारी के अनुसार, धूल से भरा ये ओखू (Ookhu Village) गांव झेलम नदी के किनारे स्थित है।

Knowledge News: जम्मू कश्मीर में पेंसिल विलेज के नाम से मशहूर गांव के बारे में जानें खास बातें, पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं जिक्र
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Knowledge News: भारत में जम्मू-कश्मीर (Kasmir) के पुलवामा में एक ऐसा गांव है जो कि 'पेंसिल विलेज' के नाम से मशहूर है। जानकारी के अनुसार, धूल से भरा ये ओखू (Ookhu Village) गांव झेलम नदी के किनारे स्थित है। तो चलिए जानते हैं आखिर ये गांव पेंसिल विलेज के नाम से क्यों मशहूर है।

'पेंसिल विलेज' के नाम मशहूर है ओखू गांव

बता दें कि देश भर में 'पेंसिल विलेज' के नाम मशहूर ओखू गांव में स्लेट निर्माण का कार्य होता है। इसकी तीन यूनिट हैं। जोकि पेंसिल बनाने के लिए कच्चे माल की तरह उपयोग में लाया जाता है। ऐसा बताया जाता है कि एक दशक पहले इस गांव में इस तरह की कोई यूनिट (इकाई) नहीं थी। पर आज ओखू गांव पेंसिल निर्माण उद्योग में एक बहुत बड़ी और अहम भूमिका निभा रहा है।

साल 2013 में ओखू गांव में स्लेट निर्माण की सबसे पुरानी यूनिट स्थापित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, झेलम एग्रो इंडस्ट्रीज के पहले यहां से लकड़ी के लट्ठों को जम्मू और पंजाब के चंडीगढ़ भेजे जाते थे। एक लकड़ी के कारोबारी के बेटे अलाई के परिवार ने अपनी जमीन बेचकर आरा मशीन की यूनिट खोली। आरा मशीन (Sawmill) सेब के बक्सों की पैकिंग के काम में आ गई। मगर मौसमी कारोबार होने की वजह से इसमें कुछ साख कमाई नहीं थी। साल 2012 में वे जम्मू में पेंसिल निर्माताओं से मिले और वहां अलाई ने उन्हें पेंसिल के लिए कच्चा माल देने की बात कही। यहीं से इस गांव में बड़े बदलाव की नींव पड़ गई।

पेंसिल उद्योग के लिए कच्चे माल की जरूरत अधिक बढ़ गई थी। फिर अलाई के पूरे परिवार ने पेंसिल के लिए कच्चे माल का निर्माण शुरू कर दिया। मांग अधिक बढ़ी और काम को समय पर पूरा करने के लिए अलाई ने 15 स्थानीय लोगों को अपनी यूनिट में नौकरी दी। अलाई ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए जम्मू एंड कश्मीर बैंक से लोन भी लिया। जिसके बाद उन्होंने जनरेटर और अन्य मशीनें लगाईं।

जो कच्चा माल दिया जा रहा था उसकी गुणवत्ता बहुत अच्छी थी। गुणवत्ता बहुत अच्छी होने के बाद भी कच्चा माल काफी सस्ता था। जिस वजह से इसी गांव में पेंसिल स्लेट बनाने की बात शुरू हो गई। इसके संयंत्र की स्थापना की बात हुई जो पेंसिल निर्माण का आधा काम होता है। यह स्लेट लकड़ी की एक पट्टी होती है जिससे 4 पेंसिल बन सकती हैं। एक यूनिट लगाने में करीब दो करोड़ रुपये का खर्चा आता है। मशीनरी में निवेश के लिए बचत का पैसा लगाने के साथ लोन लिया गया और धीरे धीरे पूरा गांव पेंसिल स्लेट के निर्माण के काम में लग गया।

बता दें कि एक यूनिट में में 100 लोग काम करते हैं जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। अब देश में ये ओखू गांव पेंसिल विलेज के नाम से जाना जाता है। पीएम मोदी भी अपने मन की बात कार्यक्रम में इस गांव का जिक्र कर इसे चर्चा में ला चुके हैं।

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