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Kargil Vijay Diwas 2019 Shayari : कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के लिए बेहतरीन शायरी कलेक्शन

Kargil Vijay Diwas 2019 Shayari (कारगिल विजय दिवस 2019 शायरी) 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है, लोग कारगिल युद्ध (Kargil War) में शहीद (Martyr) हुए जवानों की याद में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कारगिल विजय दिवस पर शायरी-कोट्स गूगल पर सर्च कर रहे है, इसलिए हम आपके लिए कारगिल विजय दिवस की सबसे सुंदर शायरी लेकर आये हैं।

Kargil Vijay Diwas 2019 Shayari : कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के लिए बेहतरीन शायरी कलेक्शनKargil Vijay Diwas 2019 Shayari

Kargil Vijay Diwas Shayari कारगिल विजय दिवस शायरी / कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) 26 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन कारगिल युद्ध (Kargil War) में शहीद (Martyr) हुए जवानों के सम्मान हेतु प्रतिवर्ष 26 जुलाई (26 July) को मनाया जाता है। 1999 में भारत और पाकिस्तान (India-Pakistan) के बीच कारगिल युद्ध हुआ था। 60 दिनों तक चले इस युद्ध में भारत ने विजय प्राप्त की और कारगिल पर अपना कब्जा जमाया। भारत और पाक के बीच हुआ कारगिल युद्ध आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था। आइए हम आपको इस मौके पर देशभक्ति से लबरेज शायरों के अल्फ़ाज़ों से रू-ब-रू कराते हैं। इन शायरी को आप अपने दोस्तों, रिश्तेदार और अन्य चाहने वालों को सोशल मीडिया टूल के माध्यम से शेयर कर कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) की शुभकामनाएं दें सकते हैं।

Kargil Vijay Diwas Shayari / India Pakistan / Martyrs Shayari / Patriotic Shayari / Shaheed Shayari / Kargil Vijay Diwas In Hindi

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

- लाल चन्द फ़लक


ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो

प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कान्तिमय हो

- राम प्रसाद बिस्मिल


लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है

उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

-फ़िराक़ गोरखपुरी


वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे

मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

- अज्ञात


दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

-लाल चन्द फ़लक


तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर

सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर

-अमीर मीनाई


जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर

ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की

-जमील मज़हरी


जिंदगी जब तुझको समझा, मौत फिर क्या चीज है

ऐ वतन तू हीं बता, तुझसे बड़ी क्या चीज है

अज्ञात


हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके लेकिन

ऐ ख़ाक-ए-वतन क़र्ज़ अदा क्यूँ नहीं होता

- वाली आसी


सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

- बिस्मिल अजीमाबादी


Kargil Vijay Diwas Shayari / Patriotic Shayari / Shaheed Shayari

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