Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Kabirdas Jayanti 2019 : कबीरदास की जयंती कब है, जानें कबीर के दोहे, जिन्हें पढ़कर बदल जाएगा आपका जीवन

कबीरदास जी (KabirDas) हिंदी के ऐसे महान कवि हैं जिन्होंने अपने दोहा के जरिए भारतीय समाज की कुरीतियों को दूर करने में अथक प्रयास किया था। इनके जन्म (Kabirdas jayanti) के संबंध में इतिहासकारों का अनेक मत हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कबीरदास स्वामी रामानंद के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राम्हण महिला के कोख से जन्म लिया था। ब्राम्हण महिला ने नवजात कबीरदास को समाज के लोकलज्जा के डर से काशी के लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया था।

Kabirdas Jayanti 2019 : कबीरदास की जयंती कब है, जानें कबीर के दोहे, जिन्हें पढ़कर बदल जाएगा आपका जीवन
X

कबीरदास जी (KabirDas) हिंदी के ऐसे महान कवि हैं जिन्होंने अपने दोहा के जरिए भारतीय समाज की कुरीतियों को दूर करने में अथक प्रयास किया था। इनके जन्म (Kabirdas jayanti) के संबंध में इतिहासकारों का अनेक मत हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कबीरदास स्वामी रामानंद के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राम्हण महिला के कोख से जन्म लिया था। ब्राम्हण महिला ने नवजात कबीरदास को समाज के लोकलज्जा के डर से काशी के लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया था।

कहा जाता है कि कबीरदास के माता-पिता की कोई जानकारी नहीं है, उन्हें नीरू व नीमा नामक जुलाहे दंपत्ती ने उनका पालन-पोषण किया था। उन्ही ने कबीर को तालाब के किनारे से उठाया था। बाद में इस बालक का नाम कबीर रखा। कबीर ने स्वयं को एक दोहे के जरिए एक जुलाहा कहा है...जाति जुलाहा नाम कबीरा, बनि बनि फिरो उदासी। उनके धर्म के बारे में भी बहुत विवाद रहा है। कुछ मानते थे कि वे मुसलमान थे और रामानंद के संपर्क में आने से हिंदु धर्म का ज्ञान हुआ।

मगहर को लेकर लोगों में बहुत नकारात्मक विचार थे, लोग कहते थे कि काशी में मरने वालों को मोक्ष मिलता है और मगहर में मरने वालों को नरक। इसी कारण से अपने अंतिम दिनों में कबीर काशी जैसी मोक्षदायिनी जगह को छोड़कर समाज में मगहर चले गए ताकि लोगों द्वारा बनाया हुआ मिथक टूट सके, और 1518 में यहीं उनकी मृत्यु हो गई।

कबीरदास ने समाज में फैली कुरीतियों पर अपने दोहा (Kabirdas Doha) के जरिए दूर करने का प्रयास किया था, ऐसा हम किताबों में अक्सर पढ़ते हैं, आईए उनके द्वारा लिखे कुछ अनमोल दोहों (Kabirdas Top 10 Doha) को फिर से दुहराते हैं...

1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।


2. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।


3. साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,

सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।


4. तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,

कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।


5. धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,

माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।


6. जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।


7. दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,

अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।


8. जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,

मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।


9. बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,

हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।


10. अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story