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पुलवामा शहीद की पत्नी सभी पैसे लेकर घर से हुई रवाना, कहा इसपर उसके माता पिता का हक नहीं

जम्मू कश्मीर : पुलवामा शहीद मनोज की बीवी ने बताया कि सरकार की तरफ से उसे 51 लाख की राशि दी गई। जिसका उपयोग वो अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने में करना चाहती है।

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पिछले साल 14 फरवरी को आतंकवादी हमला किया गया था। जिसमें 45 बहादुर जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के कारण देशभर में मातम का माहौल था। सबसे ज्यादा देशवासियों को इस बात की चिंता थी कि अब उन शहीदों के परिवारों का क्या होगा। किसी की छोटी सी बच्ची थी तो किसी की नई-नई शादी हुई थी।

उन्हीं जवानों में से एक था मनोज कुमार बेहरा जो उसी हमले में शहीद हो गया था। मनोज के जाने के बाद उसके परिवार को बेशुमार गरीबी देखनी पड़ी और फिर वादे के अनुसार जब सरकार की तरफ से उसके परिवार को वित्तीय सहायता मिली तो मनोज की पत्नी सारे पैसे लेकर उसके घर और उसके माता-पिता को छोड़कर वहां से चली गई है।

क्या है पूरा मामला

मनोज कुमार बेहरा का घर कटक जिले के नियाली क्षेत्र के रतनपुर गांव में स्थित है। इस गांव में उसकी बीवी और उसके माता-पिता रहते हैं। बता दें कि मनोज की मौत के बाद सरकार ने मनोज के परिवार से वादा किया था कि सरकार उसके परिवार को वित्तीय सहायता मुहैया करवाएगी। वादे के अनुसार जब सरकार ने उसके परिवार को वित्तीय सहायता दी तो उसकी बीवी सारे पैसे लेकर उसके घर से चली गई और उसके माता-पिता को दर-दर की ठोकर खाने के लिए अकेले छोड़ दिया।

मनोज के पिता ने बताया

मनोज के पिता जितेन्द्र बेहरा ने बताया कि मनोज की बीवी के अकाउंट में कुल 55 लाख रुपये सरकार ने जमा करवाए। जिसमें से 25 लाख राज्य सरकार के द्वारा और 30 लाख केन्द्र सरकार के द्वारा दिए गए। सब काट के कुल 51 लाख उसकी बीवी को मिले। पैसे लेने के बाद उनकी बहू वहां से चली गई और उन दोनों को गरीबी में मरने के लिए छोड़ दिया। उनकी बहू ने सरकारी नौकरी भी ये कहकर नहीं ली कि जबतक उसका बच्चा पांच साल का नहीं हो जाता तब तक वो कोई नौकरी नहीं कर सकती है। बता दें कि इस बात को मनोज की बीवी ने भी कन्फर्म किया है कि सरकार की तरफ से उसे 51 लाख की राशि दी गई। जिसका उपयोग वो अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने में करना चाहती है।

मनोज के पिता को कोई हक नहीं

अपना दर्द बयान करते हुए मनोज के पिता ने कहा कि उनका बेटा उनके लिए सबकुछ था। उसके जाने के बाद अब उनका कोई नहीं रहा और उनकी जिंदगी बहुत ही दयनीय हो गई है। जब वो जिंदा था तब वही उनका ख्याल रखता था। सरकार ने जो भी पैसे जमा करवाए, वो उनकी बहु के अकाउंट में करवाए और अब वो कहती है कि उस पैसे पर हमारा कोई हक नहीं है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करुं और मदद के लिए कहां जाउं।

पूरा गांव है सदमे में

गांववालों को भी लगता है कि मनोज के पिता के साथ अन्याय हुआ है और उसके परिवार के लोगों की मदद करने वाला कोई नहीं है। पूरा गांव इस घटना की वजह से सदमे में है। उनका कहना है कि हमें विश्वास नहीं होता कि मनोज की मौत के बाद मनोज के बूढ़े माता-पिता के साथ ऐसा होगा। वो लोग बिना किसी आय के दुखित जीवन जीने को मजबूर है।

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