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International Girl Child Day: बेटियों के लिए देश में चलाई गई ये योजनाएं, सुधरेगा भविष्य

International Girl Child Day: दुनिया में हर साल 11 अक्टूबर (11 October) को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girl Child Day) मनाया जाता है और भारत में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य बच्चियों के साथ भेदभाव को कम करना और समानता का अधिकार देना है।

International Girl Child Day: बेटियों के लिए देश में चलाई गई ये योजनाएं, सुधरेगा भविष्यInternational Girl Child Day These schemes launched for daughters bright future in india

International Girl Child Day: दुनिया में गर्ल चाइल्ड के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक स्पेशल दिन बनाया हुआ है। जो हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसे हम अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girl Child Day), गर्ल चाइल्ड के नाम से जानते हैं। भारत ही नहीं दुनिया में लोगों को लड़कियों के साथ होने वाले लिंग के आधार पर भेदभाव से बचाने के लिए जागरूक अभियान चलाया जाता है। इसे लड़कियों का दिन और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस भी कहा जाता है।

भारत में कब मनाया जाता है बालिका दिवस

जहां दुनिया में हर साल 11 अक्टूबर को बालिका दिवस मनाया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ हर साल 24 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लड़कियों को हर मामले में ज्यादा सहयोग और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर मुमकीन सुविधाएं देना, जिससे उनका भविष्य सुधर सके। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 2008 में इसकी शुरुआत की गई। जिसमें लड़कियों को समान अधिकार देने पर फोकस किया जाता है। लकियों का भी पूरा अधिकार बनता है कि वो समाज में अपनी बात को रख सकें।


बालिकाओं के प्रति जागरुक

दुनिया में लड़कियों के साथ लिंग के आधार पर लैंगिक असमानता के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है तो वहीं लड़कियों को भी अधिकारों के बारे में बताया जाता है। असमानता में शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा, हिंसा और जबरन बाल विवाह जैसे चीजें शामिल हैं।

सरकार की सबसे बड़ी मुहिम

गर्ल चाइल्ड के लिए भारत सरकार ने कई मुहिमें चलाई हुई हैं लेकिन इसमें 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' एक बड़ी मुहिम है। लिंग अनुपात को कम करने के लिए सरकार ने इस मुहिम को शुरू किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 में पीएम मोदी ने 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम' शुरू की थी। जिसके बाद 21 राज्यों ने इस मुहिम को अपनाया और लिंग अनुपात में अंतर भी आया। इस मुहिम के तहत तीन मुख्य लक्ष्यों को ध्यान में रखा गया। इसमें एक कन्या भ्रूण हत्या का रोकथाम, दूसरा कन्याओं की सुरक्षा व समृद्धि अंत में तीसरा था शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना है। हरियाणा जैसे राज्य में लिंग अनुपात में अंतर आया है। सरकार हर साल बालिकाओं के विकास के लिए 100 करोड़ का बजट रखती है।


भारत सरकार ने चलाई ये योजनाएं

1. बालिकाओं की शिक्षा (Education of girls)

2. स्वास्थ्य सेवाएं (Health Services)

3. भ्रूण हत्या पर अंकुश (Curb Feticide)

4. आर्थिक सहायता (Financial Assistance)

5. बेटियों की शादी (Daughters wedding)

6. लिंगानुपात को बढ़ावा देना (Promoting Sex Ratio)

7. छात्रवृत्ति लाभ (Scholarship Benefits)

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