Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

बेअंत सिंह और सतवंत ने क्याें की थी इंदिरा गांधी की हत्या जानें वजह

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारोपियों को आज ही के दिन फांसी दी गई थी। सतवंत सिंह और बेअंत सिंह इंदिरा गांधी के सुरक्षा में लगे हुए थे। 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी के सरकारी आवास पर उन्हें गोली मार दी थी।

बेअंत सिंह और सतवंत ने क्याें की थी इंदिरा गांधी की हत्या जानें ,वजहबेअंत सिंह और सतवंत और इंनसेट में स्वगीय इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)

देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या में शामिल सतवंत सिंह और केहर सिंह को आज ही के दिन (6 जनवरी) फांसी दी गई थी। यह दोनों पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारोपी थे। सतवंत सिंह और बेअंत सिंह इंदिरा गांधी के सुरक्षा में लगे हुए थे। 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी के सरकारी आवास पर उन्हें गोली मार दी थी। इस षड्यंत्र में केहर सिंह भी शामिल था। बेअंत सिंह को उसी वक्त मौके पर मौजूद अन्य सुरक्षा कर्मियों ने मार गिराया था।

इंदिरा गांधी की मौत से देश को भारी क्षति हुई। इंदिरा की हत्या के बाद राजधानी दिल्ली में दंगें भड़क गए। दिल्ली में करीब 5 हजार सिखों की निर्मम हत्या कर दी गई। इस मामले में आज तक दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है।

कठोर फैसलों ने ले ली इंदिरा की जान

देश ने एक आयरन लेडी को खो दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने कठोर फैसलों के लिए जानी जाती थी। ऐसा ही एक कठोर फैसला इंदिरा गांधी के लिए मौत लेकर आया। आइए जानें वह कौन सी वजह रही जिससे उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान ले ली।

- इंदिरा गांधी ने आपरेशन ब्लू स्टार के तहत 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर स्वर्ण मंदिर में सेना भेज दी थी।

- खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए यह अभियान चलाया गया था

-पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था।

-1981 में जरनैल सिंह भिंडरावाले का अलगाववादी सिख आतंकवादी समूह अमृतसर स्वर्ण मंदिर के भीतर तैनात हो गया था।

-अलगाववादी सिख आतंकवादी समूह का सफाया करने के लिए 3 जून को भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर लिया।

- आपरेशन ब्लू स्टार के तहत पूरे अमृतसर शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था

- 4 जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी ताकि मंदिर में मौजूद चरमपंथियों के हथियारों और असलहों का अंदाजा लगाया जा सके।

- चरमपंथियों ने सेना के खिलाफ 5 जून को बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को इस्तेमाल किया था।

- इस कार्रवाई में काफी खून-खराबा हुआ। अकाल तख्त पूरी तरह तबाह हो गया। 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए।

-493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ्तार किया गया।

- इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची, जिसका असर ये हुआ कि 4 महीने बाद इंदिरा गांधी के सिख अंगरक्षकों ने उनकी हत्या कर दी।


इंदिरा गांधी को हो गया था मौत का अहसास

इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद इंदिरा गांधी को अहसास हो गया था कि उनकी जान पर खतरा है। खुफिया एजेंसियों को भी उनकी मौत की साजिश के बारे में जानकारी थी, इसलिए उनके सिख गार्ड्स को हटाने का फैसला किया गया, लेकिन इंदिरा को ये फैसला मंजूर नहीं था। इसके बाद सिख गार्डों को वापस लाया गया।

चिंता नहीं है कि मैं जीवित रहूं या नहीं रहूं

अपनी हत्या से एक दिन पहले इंदिरा ने भुवनेश्वर में अपने भाषण में उन्होंने कहा कि चिंता नहीं है कि मैं जीवित रहूं या नहीं रहूं, जब मेरी जान जाएगी तो मैं कह सकती हूं कि मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को जीवित करेगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें अपनी मौत का पूर्व आभास हो चुका था।

इंदिरा की मौत के पीछे बेअंत सिंह और सतवंत सिंह सिर्फ मौहरे थे, जबकि साजिश तो किसी और ने ही रची थी। बेअंत और सतवंत ने इंदिरा को मारने के बाद अपने हथियार नीचे डाल दिए और कहा कि हमें जो करना था, कर दिया अब तुम्हें जो करना है कर लो। इंदिरा गांधी के अन्य अंगरक्षकों से भिड़ंत में बेअंत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन सतवंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।


Next Story
Top