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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को सेना का समर्थन, कहा रक्षा क्षेत्र में मिलेगी मजबूती

भारतीय सेना के उप-सेनाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते दिनों किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान के ऐलान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि इससे भारत के रक्षा क्षेत्र में आने वाले दिनों में काफी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

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भारतीय सेना के उप-सेनाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते दिनों किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान के ऐलान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि इससे भारत के रक्षा क्षेत्र में आने वाले दिनों में काफी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

यहां सोसाइटी फार इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित एक वेबीनार में उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बीते 17 मई को रक्षा क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं और नीतिगत सुधारों के ऐलान की वजह से रक्षा खरीद और जीविका के क्षेत्र में सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। सेना की क्षमताबद्ध तैनाती 80 फीसदी है। जबकि 92 फीसदी बजट स्वदेशी उत्पादों और सेवाओं से जुड़ा हुआ है।

एफडीआई से लाभ

उन्होंने कहा कि एफडीआई की सीमा को 49 से बढ़ाकर 74 फीसदी करने से भी रक्षा क्षेत्र को काफी मजबूती मिलेगी। ओएफबी का कॉरपोटाइजेशन, स्वदेशी कलपुर्जों की खरीद पर जोर जैसे नीतिगत फैसलों की वजह से सामरिक परिदृश्य बदलेगा। विदेशों से आयातित कलपुर्जों व अन्य सामान की भी एक सूची बनेगी जिसकी वजह से स्वदेशी और एमएसएमई को सेना की काफी हद तक जरूरतें पूरा करने का मौका मिलेगा। संवेदनशील गोलाबारूद्ध की खरीद को लेकर सेना में ओएफबी से हटकर निजी कंपनियों की ओर रूख किया जा रहा था। लेकिन जल्द ही यह भी स्वदेशी की सूची में शामिल हो जाएगा।

मजबूत वित्तीय आधार

उपसेनाप्रमुख ने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि रक्षा मंत्रालय द्वारा जरूरी सैन्य सामग्री को लेकर तैयार की जा रही प्रतिबंधित आयात सूची के बाद भी ऐसा नहीं होगा कि सशस्त्र सेनाएं विदेशों से कोई जरूरी या चुनौतीपूर्ण तकनीक नहीं खरीदेंगी। उन्होंने स्टार्टअप्स और एमएसएमई से भी इस बात की अपील की कि वह सैन्य चुनौतियों के समाधान को लेकर इस प्रकार की तकनीक या समाधान लेकर आएं जिनका असैन्य कार्यों में भी प्रयोग किया जा सके।

इससे इनकी कीमत घटेगी और कम या लंबे समय के लिए वित्तीय आधार पर इन्हें मजबूती भी मिलेगी। बड़े उद्योगों को शोध और अनुसंधान में अहम भूमिका निभाते हुए छोटे एमएसएमई के लिए बेहतर ईको सिस्टम तैयार करने के लिए मदद करनी चाहिए। जिससे वह भी भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।

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