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Indian Air Force Day 2019: जानें कैसे बनते हैं दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने वाले फाइटर पायलट

Indian Air Force Day 2019/ आज वायुसेना अपना 87वां साल मना रही है। इस खास मौके पर दिल्ली से सटे गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर वायुसेना के जवान भारत की ताकत को दिखाएंगे। सेना के जवान लड़ाकू विमानों के साथ करबत का शानदार प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले जानें आखिर कैसे बनते हैं फाइटर पायलट...

Indian Air Force Day 2019: जानें कैसे बनते हैं दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने वाले फाइटर पायलटIndian Air Force Day 2019 how to become fighter pilots

Indian Air Force Day 2019/ 8 अक्टूबर 1932 को रॉयल एयर फोर्स (भारतीय वायुसेना) की स्थापना हुई थी। हर साल इस दिन एयरबेस पर समारोह होता है। जहां पर सभी अधिकारी मौजूद होते हैं। इसमें वायुसेना के जवान या पायलट उम्मदा प्रदर्शन करते हैं। ऐसे में हर साल हजारों लोग भारतीय वायुसेन में शामिल होते हैं। हम यहां आपको ऐसे ही बहादूर जवानों के बारे में बता रहे हैं जो जंग के मैदान में दुश्मनों के दांत खट्टे कर देते हैं। भारतीय सेना में शामिल होने वाले जवानों एक ट्रेनिंग के बाद ही फाइटर पायलट बनते हैं।

कैसे बनते हैं फाइटर पायलट

भारतीय फाइटर पायलटों को अपनी हेल्थ और मानसिक दोनों तरफ से फिट होना चाहिए। फाइटर पायलट बनने के लिए जवान को भारतीय वायु सेना अकादमी में जाना होता है। उसे पहले उसे कई टेस्ट देने होते हैं। इसकी ट्रेनिंग तीन चरणों में होती है।


पहला चरण

सबसे पहले चरण में पायलट को 6 महीने तक उड़ान से संबंधित ट्रेनिंग दी जाती है। पायलट पहले एक ट्रेनर विमान पर तकनीकी ट्रेनिंग लेता है। जिसमें वायु युद्ध के सिद्धांतों के बारे में बताया जाता है।

दूसरा चरण

स्टेज वन की ट्रेनिंग के बाद पायलट फाइटर, हेलीकाप्टर या परिवहन की ट्रेनिंग में से किसी एक को चुनता है। फाइटर ट्रेनर ने स्टेज 2 की ट्रेनिंग, अकादमी में एक 24 हफ्ते की होती है। जो उनकी योग्यता को आगे बढ़ाने और सीखने में मदद करती है। स्टेज 2 की ट्रेनिंग के सफल होने वाले स्नातक कमीशन अधिकारी बनते हैं। इसमें स्टेज 24 तक ट्रेनिंग होती है।


तीसरा चरण

पहला और दूसरा चरण पूरा करने के बाद स्टेज 3 को पूरने में 12 महीने का वक्त लगता है। तीसरे और अंतिम चरण की ट्रेनिंग अवधि 12 महीनों की होती है और साथ में उड़ान के घंटे भी बढ़ जाते हैं। इसके बाद फाइटर पायलटों को उनके स्क्वाड्रनों को सौंपा दिया जाता है। जो फील्ड में उतरते हैं।

इसके अलावा पायलट के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रेनिंग होती है नॉनकोम्बैट ट्रेनिंग। वायुसेना के फाइटर पायलट ट्रेनर अपना सारा समय क्लास और कॉकपिट में नहीं बिताते हैं। बल्कि वायु सेना अकादमी में ट्रेनर को विमानन चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाती है। एक पायलट को आपातकाल में चिकित्सा का भी ज्ञान होना चाहिए। इसके बाद उसकी पूरी ट्रेनिंग होती है।

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