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चीन के सेना पीछे हटाने पर भारत को अभी भी नहीं भरोसा, पांचवीं बैठक में फिर उठाएगा मुद्दा

बीते करीब ढाई महीने से अधिक से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी विवाद के बीच मंगलवार को चीन की ओर से पूर्वी लद्दाख के कुछ विवादित बिंदुओं से अपनी सेनाओं की वापसी को लेकर आए बयान पर भारत पूरी तरह से कोई भरोसा नहीं कर रहा है

चीन के सेना पीछे हटाने पर भारत को अभी भी नहीं भरोसा, पांचवीं बैठक में फिर उठाएगा मुद्दा
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भारतीय सेना (प्रतीकात्मक फोटो)

बीते करीब ढाई महीने से अधिक से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी विवाद के बीच मंगलवार को चीन की ओर से पूर्वी लद्दाख के कुछ विवादित बिंदुओं से अपनी सेनाओं की वापसी को लेकर आए बयान पर भारत पूरी तरह से कोई भरोसा नहीं कर रहा है और अब उसने पांचवे दौर की कोर कमांडर स्तर की बैठक में अपनी बात फिर से मजबूती से चीनी के सामने रखने की तैयारी करना शुरू कर दिया है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सैन्य स्तर की यह बैठक हो सकती है। क्योंकि दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एलएसी विवाद के हल को लेकर संयुक्त सचिव स्तर की डब्ल्यूएमसीसी की अहम बैठक हाल ही में चुकी है। गौरतलब है कि चीन मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में 28 जुलाई को उनके विदेश मंत्रालय के हवाले से यह बयान जारी किया गया है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी के कुछ विवादित इलाकों से चीनी सेना की वापसी हो गई है और अब पांचवें दौर की सैन्य स्तर की बैठक की तैयार की जा रही है।

उधर शुरुआती बैठकों के बाद सेनाओं की वापसी पर सहमत चीन ने बीते 15 जून को गलवान घाटी के गश्त बिंदु 14 पर अपने वादे से मुकरते हुए हिंसक झड़प के दौरान 20 भारतीय जवानों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने चीनी सेना के करीब 35 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। जिसकी चीन ने आजतक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

यथास्थिति बहाली चाहिए

भारत चीन द्वारा एलएसी पर अप्रैल 2020 के मध्य में दोनों सेनाओं द्वारा की जा रही गश्त जैसी यथास्थिति बहाल करने के बाद ही पूर्ण शांति को स्वीकारेगा। पांचवें दौर की बैठक में भारतीय कमांडर चीन के समक्ष एलएसी पर सच्चाई के साथ जमीनी स्तर पर सेनाओं की वापसी की कार्रवाई को पूरा करने के लिए दवाब डालेंगे।

साथ ही पेंगांग त्सो झील के फिंगर इलाके, गलवान घाटी के हॉट स्प्रिंग, देपसांग प्लेंस के अलावा एलएसी के गहराई वाले इलाकों में भारी साजो सामान के साथ तैनात चीनी सेना की पूर्ण वापसी का मुद्दा भी उठाया जाएगा। भारत लद्दाख में जारी सीमा विवाद को हल करने के लिए हुई बीते चार दौर की बैठकों में बनी सहमति का चीन द्वारा धरातल पर पालन न किए जाने को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी चीनी पक्ष के समक्ष जाहिर करेगा।

गौरतलब है कि पांचवें दौर की इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह स्थित सेना की 14वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे। जबकि चीनी दल का नेतृत्व दक्षिणी शिनजियांग सैन्य प्रांत के प्रमुख मेजर जनरल लियु लिन करेंगे।

सतर्क सेना की तैयारी पूरी

भारतीय सेना एलएसी पर चीन के हर कदम का जमीनी स्तर पर महीन विशलेषण करने के अलावा उस पर कड़ी निगरानी भी रख रही है। पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लद्दाख का दौर कर सुरक्षा हालात का जायजा ले चुके हैं। जम्मू कश्मीर स्थित सेना की उत्तरी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाई.के.जोशी कह चुके हैं कि ड्रैगन सेना अचानक से एलएसी के कुछ बिंदुओं पर आकर डट गई।

इससे हमें चौंके जरूर थे। लेकिन हमारी तैयारी पूरी है और हम हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इस वक्त लद्दाख में तैनात किए गए सेना के करीब 40 हजार अतिरिक्त जवानों के लिए सर्दियों में तैनाती के लिए जरूरी राशन, टेंट, कपड़े, जूते, ईंधन, सैन्य रसद इत्यादि की तेज गति से सप्लाई की जा रही है। गौरतलब है कि चीन की कथनी और करनी के बड़े अंतर को देखते हुए सेना के अलावा वायुसेना और नौसेना भी हाई अलर्ट पर हैं। रक्षा मंत्री लगातार सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।

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