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विशेष : अमेरिका पाकिस्तान के पीछे खड़ा रहा लेकिन भारत ने उसके दो टुकड़े कर बना दिया बांग्लादेश

शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की 169 सीटों में 167 सीटें जीत ली। इस बड़ी जीत के बाद वह आराम से संसद में बहुमत साबित कर सकते थे पर सरकार को नियंत्रित कर रही पाकिस्तानी सेना को ये कत्तई मंजूर नहीं था। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में अलग देश को लेकर आंदोलन तेज हो गया। पाकिस्तान की सेना अपने असली चेहरे में आकर वहां जुल्म करने लगी।

विशेष : अमेरिका पाकिस्तान के पीछे खड़ा रहा लेकिन भारत ने उसके दो टुकड़े कर बना दिया बांग्लादेश
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साल 1971 भारत के लिए खासा महत्व रखता है। यूं तो भारत में आम चुनाव अगले साल यानी 1972 में होने थे पर बैंको के राष्ट्रीयकरण और पूर्व महाराजाओं और राजाओं को मिलने वाले प्रिवी पर्स बंद होने से मचे घमासान की वजह से तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने इसे एक साल पहले ही करवा दिया। 'गरीबी हटाओ' का उनका नारा बेहद सफल रहा, इसीकारण कांग्रेस को चुनाव में जबरदस्त जीत मिली।

ये साल भारत के पड़ोसी देशों के लिए भी खास था। पाकिस्तान में पहली बार आम चुनाव हो रहे थे, जुल्फिकार अली भुट्टो (Zulfikar Ali Bhutto) की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सामने शेख मुजीबुर्रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) की नेशनल अवामी लीग थी। एक ओर भुट्टो जहां 'रोटी, कपड़ा और मकान' के नारे के साथ चुनावी समर में थे तो वहीं दूसरी तरफ शेख मुजीबुर्रहमान बंगाली मुसलमानों के साथ बांग्ला भाषा बचाने व उन्हें स्वायत्तता दिलवाने के मुद्दे के साथ चुनाव में ताल ठोक रहे थे।

चुनाव में शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की 169 सीटों में 167 सीटें जीत ली। इस बड़ी जीत के बाद वह आराम से संसद में बहुमत साबित कर सकते थे पर सरकार को नियंत्रित कर रही पाकिस्तानी सेना को ये कत्तई मंजूर नहीं था। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में अलग देश को लेकर आंदोलन तेज हो गया। पाकिस्तान की सेना अपने असली चेहरे में आकर वहां जुल्म करने लगी।


अवामी लीग के नेता मुजीबुर्रहमान को सेना ने गिरफ्तार कर लिया। पार्की के तमाम नेता भागकर भारत की शरण में आ गए। साथ ही करीब एक करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से भारत में आ गए। पाकिस्तान की वायुसेना ने भारत पर भी आक्रमण कर दिया। जिसके बाद भारत की प्रधानमंत्री खुलकर सामने आ गई। पूर्वी पाकिस्तान पर हो रहे आक्रमण को लेकर वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहुंची।

उस वक्त सोवियत संघ दुनिया का सबसे ताकतवर माना जाता था, इंदिरा गांधी ने सोवियत संघ के सामने इस मसले को उठाया पर उन्हें जब फायदा होता नजर नहीं आया तो एक स्वर में बोली हम जा रहे सैन्य कार्रवाई करने, अगर आप मदद करते हैं तो ठीक है नहीं करते है तब भी ठीक है। भारत पहली बार वैश्विक स्तर पर इतनी मजबूती से अपनी बात कहकर पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरु करने की तैयारी करना कर ली।

29 अप्रैल को एक अहम बैठक हुई और पीएम इंदिरा गांधी ने सेनाध्यक्ष सैम मानेकशा को बुलाकर पूर्वी पाकिस्तान पर चढ़ाई करने का आदेश दिया। मानेकशा ने पीएम को समझाया कि अभी हालात बेहतर नहीं है, मानसून शुरू होने वाला है साथ ही चीन और अमेरिका ने भी अपने रुख साफ नहीं किया है, साथ ही सेना भी अभी बिखरी हुई कमजोर नजर आ रही है। सेनाध्यक्ष ने सेना को इकट्ठा करने के लिए मोहलत मांगी, इंदिरा ने बात को गंभीरता से समझा और मोहलत दे दी।


भारत के हमले की भनक लगते ही पाकिस्तान ने भी चीनी प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई को चिट्ठी लिखी, चिट्ठी में याहया खान ने लिखा कि भारत पाकिस्तान के दो टुकड़े करना चाहता है, इसपर चाऊ एन लाई ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच जंग हुई तो वह पाकिस्तान के साथ खड़ा हो जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका को भी अपने भरोसे में ले लिया, अमेरिका के पाकिस्तानी पाले में जाते ही रुस भारत के पाले में खड़ा हो गया।

हालात लगातार बदतर होते जा रहे थे, पाकिस्तानी सेना का जुल्म लगातार जारी रहा। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत की पश्चिमी सीमा पर हमला बोल दिया। अब जंग दोतरफा हो गई। भारत इसके लिए पूरी तरह से तैयार था। उसने पाकिस्तान का समुद्री रास्ता रोक लिया, सर्दी का मौसम था इसलिए हिमालय की दिशा से पाकिस्तान को चीन की सहायता नहीं मिल पाई। भारतीय सेना ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए विपक्षी सेना को नेस्तनाबूत कर दिया। 6 दिसंबर को भारत ने बांग्लादेश को नए देश का दर्जा दे दिया। 16 दिसंबर को ढाका में पाकिस्तानी सेना के 90 हजार सैनिकों ने समर्पण कर दिया।


इस तरह से भारत पहली बार विश्व पटल पर पहली बार अपनी मजबूती को दिखाने में सफल रहा। यहां ये बताना भी जरूरी है कि पाकिस्तान की हार से बौखलाए अमेरिका ने हिंद महासागर में स्थित अपने सातवें जहाजी बेड़े को भारत की तरफ कूच करने का आदेश दे दिया, पर बीच में ही रूस ने भारत के साथ दोस्ती निभाते हुए अमेरिका को हिदायत दी कि वह इस मामले से दूर ही रहे तो उसके लिए ज्यादा बेहतर होगा।

यह पाकिस्तान की सबसे करारी हार थी, 1965 की जंग कुछ मायनों में भले ही निर्णायक न कही जाए पर यहां भारत की सीधी जीत हुई और बांग्लादेश के रूप में नया देश अस्तित्व में आया। सेनाध्यक्ष मानेकशा की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई, इंदिरा गांधी की ख्याति दुनिया में फैल गई। विपक्ष के नेता अटल बिहारी ने तब इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था।

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