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Independence Day 2019 : आजादी की कहानी, जानें 72 साल का सफरनामा

भारत में ब्रिटिश शासन 1757 में शुरू हुआ, जब प्लासी के युद्ध में ब्रिटिश जीत के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी ने देश पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया, ईस्ट इंडिया कंपनी ने 100 साल तक भारत पर शासन किया, जब तक कि 1857-58 में भारतीय विद्रोह के मद्देनजर इसे ब्रिटिश ताज से बदल नहीं दिया गया। भारत को अंग्रेजों से आजादी ऐसी ही नहीं मिली इसके पीछे एक बड़ा संघर्ष भी रहा है, आइये जानते हैं भारत की आजादी की कहानी...

Independence Day 2019 : आजादी की कहानी, जानें 72 साल का सफरनामा

Independence Day 2019, भारत पर सालों अंग्रेजों ने हुकूमत कि, लेकिन जरा सोचिए लंबे समय तक किसी की गुलामी सहने के बाद, उसके लिए आजादी के क्या मायने होंगे। भारत के लिए 15 अगस्त एक तारीख नहीं है बल्कि उसके लिए आजादी के जश्न का दिन है। देश की आजादी के लिए वीर सपूतों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।

उन्होंने तब तक चैन नहीं लिया जबतक देश को आजाद नहीं करा दिया। देश की आजादी के लिए वीर सपूतों को जेलों में रहना पड़ा और अपने प्राणो की आहुति भी देनी पड़ी थी। भारत आज अपनी आजादी का 73वां पर्व मना रहा है। 73 साल पहले भारत के लोगों ने आजादी का सूरज देखा था। हालांकि, इस दिन भारत का 2 भागो में विभाजन (बंटवारा) हुआ था।

जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान अस्तित्व में आया। भारत में हर साल 15 अगस्‍त को आजादी का जश्न हर्ष-उल्‍लास के साथ मनाया जाता है। प्रधानमंत्री दिल्‍ली में लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं और भाषण देते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत के लिए ब्रिटिश शासन से आजादी पाना आसान नहीं था। लेकिन हमारे राजनीतिक नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और लोगों ने मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और स्वतंत्रता हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प लिए थे।

आजादी की कहानी

भारत में ब्रिटिश शासन 1757 में शुरू हुआ, जब प्लासी के युद्ध में ब्रिटिश जीत के बाद, अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने देश पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 100 साल तक भारत पर शासन किया, जब तक कि 1857-58 में भारतीय विद्रोह के मद्देनजर इसे ब्रिटिश ताज से बदल नहीं दिया गया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हुआ और इसका नेतृत्व मोहनदास करमचंद गांधी ने किया, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के शांतिपूर्ण और अहिंसक अंत की वकालत की।

1946 में लेबर सरकार, ब्रिटेन के शासक ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपनी पूंजी हानि के कारण भारत पर अपना शासन समाप्त करने के बारे में सोचा। फिर, 1947 की शुरुआत में ब्रिटिश सरकार ने जून 1948 तक सभी शक्तियों को भारतीयों को हस्तांतरित करने की घोषणा की। लेकिन हिंदू और मुस्लिमों के बीच हिंसा मूल रूप से पंजाब और बंगाल में कम नहीं हुई थी।

वास्तव में जून 1947 में कई नेताओं जैसे पंडित जवाहर लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना, अबुल कलाम आज़ाद, बी आर अंबेडकर आदि। भारत के विभाजन के लिए सहमत हुए। विभिन्न धार्मिक समूहों के लाखों लोगों ने निवास करने के लिए स्थान ढूंढना शुरू कर दिया। और इस अनुमानित संख्या के कारण 250,000 से 500,000 लोग मारे गए। 15 अगस्त, 1947 को आधी रात को भारत को स्वतंत्रता मिली और जवाहर लाल नेहरू के भाषण 'भाग्य के साथ प्रयास' द्वारा संपन्न हुआ।


भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 क्या है?

20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने ऐलान किया कि भारत में ब्रिटिश शासन 30 जून 1948 तक समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद शक्तियों (Powers) को जिम्मेदार भारतीय हाथों में सौंप दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद मुस्लिम लीग ने आंदोलन किया और देश के विभाजन की मांग की।

फिर 3 जून 1947 को ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि 1946 में गठित भारतीय संविधान सभा द्वारा बनाया गया कोई भी संविधान देश के उन हिस्सों पर लागू नहीं हो सकता जो इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। इसी दिन 3 जून 1947 को भारत के वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने विभाजन योजना को सामने रखा, जिसे माउंटबेटन प्लान के नाम से जाना जाता है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने योजना को स्वीकार कर लिया। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को लागू करने की योजना को तत्काल प्रभाव दिया गया।

14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया और भारत और पाकिस्तान के दो नए स्वतंत्र डोमिनियन को सत्ता ट्रांसफर कर दी गई। लॉर्ड माउंटबेटन भारत के नए डोमिनियन के पहले गवर्नर-जनरल बने। जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। 1946 में स्थापित संविधान सभा भारतीय डोमिनियन की संसद बन गई।


भारत में स्वतंत्रता दिवस समारोह

आपको बता दें कि 2019 में भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। फुल ड्रेस रिहर्सल 13 अगस्त 2019 को लाल किले में आयोजित की गई जा चुकी है। सेना, नौसेना और वायु सेना ने लाल किले में मार्च किया और स्कूली बच्चों ने रंग बिरंगे परिधानों में रिहर्सल की। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराता हैं और लाल किले पर भाषण देता है।

राजधानी दिल्ली में विभिन्न स्कूलों और संगठनों द्वारा कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर लोग पतंग उड़ाते हैं जो भारत की स्वतंत्र भावना का प्रतीक है। दिल्ली में लाल किला भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक है क्योंकि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया था। देश में इस दिन को पूरे उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जाता है।

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