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अब 70 साल में रिटायर होंगे आईआईएम के डायरेक्टर!

एमएचआरडी मंत्रालय कानून मंत्रालय के तर्क को दरकिनार कर और 19 आईआईएम की राय लिए बिना नियमों में बदलाव को हरिझंडी देने की तैयारी में है।

अब 70 साल में रिटायर होंगे आईआईएम के डायरेक्टर!IIM director will now retire in 70 years

भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के निदेशक इन दिनों अपनी प्रचंड काबिलियत और उच्च-कोटि की बौधिक क्षमता का इस्तेमाल संस्थान का विकास करने के बजाय अपनी कुर्सी पर लंबे वक्त तक डटे रहने के लिए जरूरी जोड़तोड़ बिठाने में करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें अब केवल केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (एमएचआरडी) रमेश पोखरियाल निशंक के अंतिम ग्रीन सिग्नल का इंतजार है, जिसके बाद आईआईएम के निदेशकों की सेवानिवृति की आयु 65 से बढ़कर 70 वर्ष हो जाएगी। यह जानकारी हरिभूमि को मंत्रालय में की गई पड़ताल के दौरान मिली है। लेकिन जब हमने इस बाबत एमएचआरडी मंत्रालय से उसका पक्ष जानने की कोशिश की तो संबंधित विभागीय अधिकारी ने कुछ भी टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया।

बेंगलोर को अतिरिक्त तव्वजो

पड़ताल के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह निकलकर सामने आया कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाते वक्त मंत्रालयी अधिकारियों ने कानून मंत्रालय के डीओपीटी विभाग से स्वीकृति लेने के तर्क को खारिज करने के अलावा केवल एक आईआईएम संस्थान बेंगलोर के निदेशक प्रो़ जी.रघुराम के सुझाव पर बाकी 19 आईआईएम संस्थानों की राय लिए बिना समूची प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरु कर दी।

इसमें मंत्रालय द्वारा आईआईएम रूल्स में स्वत: बदलाव करने के अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए इस फैसले को लागू करने की कोशिश की जा रही है। बेंगलोर का मत था कि जब निदेशक या उसके समकक्ष पद पर नियुक्त अधिकारी की सेवानिवृति आयु आईआईटी, एनआईटी, आयसर और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे उच्च-शिक्षण संस्थानों में 70 वर्ष है तो आईआईएम में क्यों नहीं?

लेकिन यहां आईआईटी का मजबूत तर्क यह है कि आईआईटी ने अपनी काउंसिल से निदेशकों की सेवानिवृति की आयु बढ़ाने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर उसे लागू किया था। जबकि आईआईएम के मामले में ऐसा कुछ भी दूर-दूर तक होता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

विरोध में खड़े हुए बाकी आईआईएम

बाकी आईआईएम संस्थानों ने सेवानिवृति की आयु बढ़ाने वाले इस प्रस्ताव का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग से विरोध करना शुरू कर दिया है। प्रत्यक्ष विरोध करने वालों में आईआईएम तिरूचिरापल्ली के निदेशक प्रोफेसर भीमार्या मैत्री ने हरिभूमि से बातचीत में अपनी व्यक्तिगत राय देते हुए कहा कि केवल एक संस्थान के कहने पर सेवानिवृति की आयु बढ़ाना ठीक नहीं होगा। जबकि इसमें बाकी 19 आईआईएम संस्थानों से भी परामर्श लिया जाना चाहिए था।

स्वायत्ता पर नया कानून बनने के बाद ऐसे तमाम मसलों पर विमर्श करने के लिए एक कार्डिनेशन फोरम भी बनाया गया है। जिसमें सभी आईआईएम डायरेक्टर सदस्य के रूप में शामिल हैं। वहीं सबसे पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। अप्रत्यक्ष विरोध करने वालों में आईआईएम अहमदाबाद, कोझिकोड़ और जम्मू मुख्य हैं। इनका कहना है कि संस्थान की कमान युवा निदेशक के हाथों में सौंपी जानी चाहिए।

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